फिरोजाबाद। आसमान से बरस रही तपिश से हरे चारे की फसल करने वाले किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। जनपद के करीब 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होने वाली चारे की फसल की बुवाई देरी से होने के कारण पशु पालकों को भी महंगे दाना पानी की मुसीबत झेलनी पडे़गी।
जिले में चरी, बरसीम और रिजका की खेती करने वाले किसानों की संख्या करीब दस हजार है। लगभग 15 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में होने वाली इन फसलों की बुवाई सामान्य तौर पर 20 जून से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक होती है। लेकिन आषाढ़ की तपिश से हरे चारे की खेती करने वाले किसान परेशान हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इस सप्ताह बरसात नहीं होने की स्थिति में हरे चारे की खेती करने वाले किसानों की परेशानियां और बढेंगी। पशुपालकों को भी आने वाले दिनों महंगा चारा खरीदने के लिए विवश होना पड़ेगा।
धान की पौध भी धीरे-धीरे मुरझा रही
मानसून में हो रही देरी के कारण जून के प्रथम सप्ताह में बुवाई करने वाले किसान परेशान हैं। जिन स्थानों पर नहर अथवा सिंचाई के लिए पानी के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। उन कृषि क्षेत्रों में धान की पौध मुरझा रही है।
अगर इस सप्ताह बारिश नहीं हुई तो हरे चारे की फसल करने वाले किसानों को खासी दिक्कतें होंगी। हालांकि नहर किनारे के खेतों में ज्यादा परेशानी नहीं होगी। वर्षा में देरी के कारण उत्पादन प्रभावित होगा। वहीं हरे चारा खास तौर पर बाजरा की चरी के दाम बढेंगे।
- रविकांत सिंह जिला कृषि अधिकारी