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Firozabad News: जच्चा-बच्चा की जान खतरे में डाल रहीं दाई

Sun, 16 Jul 2023 12:21 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
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फिरोजाबाद। दाई जच्चा और बच्चा दोनों की जान खतरे में डाल रही हैं। सुहागनगरी में एक साल में 16 हजार से अधिक असुरक्षित घरेलू प्रसव हुए हैं। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने की कई योजनाओं के बाद भी जिले में बिना प्रशिक्षित प्रसवकर्मी के माध्यम से 16 हजार से अधिक बच्चों का जन्म हुआ। इसमें 375 नवजातों ने जन्म के कुछ समय बाद ही दम तोड़ दिया। तीन साल में 77, 458 बच्चों का जन्म जान जोखिम में डालकर हुआ।
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मातृ शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए सरकार संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए जननी सुरक्षा योजना, एंबुलेंस की सुविधा समेत तमाम संसाधन मुहैया कराए जा रहे हैं। सरकार आशाएं एवं एएनएम को भी प्रशिक्षित कर रही है। वर्ष 2022-23 में जिले में 16829 घरेलू प्रसव स्किल्ड बर्थ अटेंडेंट के बिना हुए। यहां परिजन ने दाई पर भरोसा कर जच्चा-बच्चा की जान को खतरे में डालने से गुरेज नहीं किया। आंकड़ों की बात करें तो जिले में बीते दिन सालों में एक लाख 29 हजार 946 बच्चों का जन्म अस्पतालों में हुआ। जबकि 77458 बच्चों का जन्म घरेलू प्रसव के माध्यम से हुआ। संवाद







स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य है कि जिले में संस्थागत प्रसव बढ़ाए जाएं। इसके लिए सीएचसी, पीएचसी पर भी सुविधा उपलब्ध है। प्रत्येक ब्लाक में दो-दो प्रसव केंद्र और बनाए जा रहे हैं। ताकि अस्पताल में प्रसव सुरक्षित हो सके। संस्थागत प्रसव के लिए तमाम योजनाएं भी संचालित हो रही हैं। - डाॅ. रामबदन राम, सीएमओ
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आंकड़े एक नजर में वर्ष - घरेलू प्रसव
2022- 16829
2021- 26915
2020- 33714



सार्वजनिक सुविधा में हो रहे 56.4 फीसदी प्रसव

जिले में 56.4 फीसदी प्रसव सार्वजनिक सुविधा वाले संस्थान में हो रहे हैं। यह बात राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण में कही गई है। यहां ऑपरेशन की सुविधा भी है। इसके अलावा चिकित्सक की भी तैनाती हो रही है। सीएचसी, पीएचसी पर एएनएम प्रशिक्षित तो हैं। मगर, यहां प्रसव की संपूर्ण सुविधा नहीं है। मरीज की हालत बिगड़ने पर रेफर किया जाता है।
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