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जैविक खेती : प्रयोग से बनाई पहचान, दूसरों को भी बढ़ा रहे आगे

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फिरोजाबाद ! उम्मीद की मशाल - उन्नतशील फसल उगाने वाले किसान लोकेश कुमार - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। अर्थशास्त्र से परास्नातक लोकेश कुमार को 2002 में कृषि गोष्ठी से मिली सीख ने जीवन की राह बदल दी। 2006 में एक एकड़ से जैविक खेती की शुरूआत की। खेती में नया प्रयोग करके न सिर्फ प्रगतिशील किसान के रूप में पहचान बनाई। बल्कि छह सौ से अधिक किसानों को जोड़कर उन्हें भी आगे बढ़ा रहे हैं। लोकेश व साथ जुड़े किसानों की सब्जियां व अनाज की आगरा, दिल्ली, भोपाल, कानपुर, लखनऊ की की मंडी में भी मांग है।
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सिरसागंज के निकटवर्ती ग्राम नगला राधे निवासी लोकेश कुमार के पिता राजेंद्र सिंह पुलिस विभाग में थे। मथुरा में तैनाती के बाद जब गांव वापस लौटे तो लोकेश कुमार के मन में खेती के प्रति प्रेम जागा। लोकेश के अनुसार, 2002 में सिरसागंज के गिरधारी इंटर कालेज में आयोजित इफ्को की किसान गोष्ठी से बहुत कुछ सीखने को मिला। इसके बाद एक एकड़ भूमि पर जैविक खेती के प्रयोगों की शुरूआत 2006 से की। वर्तमान में अपनी पांच एकड़ भूमि में खेती कर रहेे हैं।
आलू अनुसंधान केन्द्र की ओर से बीज उत्पादन तकनीक का गांव के किसानों को प्रशिक्षण भी दिला चुके हैं। आस-पास क्षेत्र के छह सौ से अधिक किसानों को जैविक कृषि की नई तकनीक का प्रयोग करके उत्पादन बढ़ाने की सीख दी।
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लोकेश कहते हैं कि आर्गेनिक फसलों जैसे अरहर की दाल, भिंडी, तोरई के साथ अन्य फसलों की बाजार में अधिक कीमत में बिक्री होती है। उन्होंने अपनी सब्जियों को एक ब्रांड बना दिया। जैविक खादों से पैदा सब्जी स्वाद और अपने रंग में अलग होती है, ऐसे में ग्राहक भी हाथों हाथ लेते हैं। लोकेश ने देश के युवा किसानों को प्रेरित करते के लिये दो बार दूरदर्शन केन्द्र नयी दिल्ली के माध्यम से विचारों को साझा कर चुके हैं।
मिल चुके हैं पुरस्कार कई पुरस्कार
लोकेश कुमार बताते हैं कि पुरस्कार मिलने की शुरूआत तो 2009 में हो गई थी। तत्कालीन जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार ने सम्मानित किया था। 2010 में कर्नाटक के मैसूर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से नेशनल इनोवेटेड फार्मर का प्रदान किया गया। 2011 में लौकी उत्पादन में जिले में व 2014 में लौकी उत्पादन में प्रदेश के उस समय के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सम्मानित किया था। 2018 में गेंदा के उत्पादन का पुरस्कार मिल चुका है।
कमा रहे सालाना आठ से दस लाख
लोकेश कुमार ने बताया कि वे सहफसली खेती करते हैं। उनके खेत में जहां एक ओर लाल भिंडी होती है तो बीच में गेंदा भी फसल के साथ बोते हैं। लोकेश के अनुसार, शुरूआत दौर में उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये थी। वर्तमान में सालाना आठ से 10 लाख रुपये कमा रहे हैं।
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