एक पखवाड़े से बारिश नहीं होने से किसानों के होश उड़े हुए हैं। खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगीं है। बाजरा की पिछैती फसलों और मिर्च की फसलों समेत दलहन एवं तिलहन की फसलों पर असर पड़ा है। किसानों का मानना है कि बारिश नहीं हुई तो सूखे जैसे हालात होंगे। खेतों में खड़ा बाजरा की फसल को कच्चा ही काटना होगा।
रबी की फसल में बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि ने जिले के अन्नदाताओं की फसल को चौपट कर दिया। आलू की बंपर पैदावार हुई लेकिन बाजार में उचित रेट नहीं मिले। किसान कोल्ड स्टोरेज का किराया देने के डर से आलू की निकासी करने नहीं जा रहा है। यही कारण है जिले के अधिकांश कोल्डस्टोरेज से दस से 15 प्रतिशत निकासी हुई। 24 अगस्त के बाद से जिले में बारिश होना बंद हो गई। अब एक पखवाड़े से बारिश नहीं होने का असर फसलों पर दिखाई दे रहा है। बाजरा की फसल सूखने लगी है। कई जगह किसान सिंचाई नहीं कर पाए तो फसल पीली हो गई। सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण किसानों ने पशुओं को हरे चारे के रूप में बाजरा की फसल को खिलाना शुरू कर दिया। अरहर, उड़द एवं मूंग की फसल बर्बाद होने लगी है। इस तरह की स्थिति जिले के सभी नौ ब्लाकों में है। इधर, जसराना एवं एका क्षेत्र में धान की फसल सूखने लगी।
जिले में जनवरी से अगस्त तक हुई
बारिश का आंकड़ा एक नजर में
औसत बारिश 627.80 मिमी
2015 में हुई 453.20 मिमी
गत वर्ष हुई 273.73 मिमी
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अगस्त में होनी चाहिए 209.10 मिमी
अगस्त माह में हुई----159.61 मिमी
फीरोजाबाद 153.75 मिमी,शिकोहाबाद में 263.00 मिमीं, जसराना में 98.40 मिमी,टूंडला में 123.30 मिमीं।
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किस फसल का कितना क्षेत्रफल
फसल क्षेत्रफल
बाजरा 75970 हेक्टेयर
मक्का 11010 हेक्टेयर
धान 22880 हेक्टेयर
दलहन 1790 हेक्टेयर
तिलहन 2085 हेक्टेयर
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ओलों का मुआवजा मिला
नहीं अब सूखे की है मार
- नगला सेंधा निवासी किसान क्षेत्रपाल ने कहा ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों का मुआवजा नहीं मिला। सूखे की मार से अभी से बाजरा एवं धान की फसलें सूखने लगीं।
- नगला पद्म जसराना निवासी डिप्टी ंसिह ने कहा 20 बीघा बाजरा की फसल बोई है,बारिश नहीं होने के कारण सूख गई है। फसलों की बर्बादी का मुआवजा तो मिला नहीं।
- रघुवीर ंसिह ने कहा कि अब तो खेती करना मुश्किल हो गया। कभी बेमौसम बारिश की मार से फसल तबाह हो रही है वही कहीं बारिश नहीं होने के कारण। अब हमें तो कुछ दिखाई नहीं देता।
- राजवीर ंसिह ने कहा कि फसलें बर्बाद होने लगीं,बारिश तो एक पखबाड़े से नहीं हुई। बाजरा की फसल की बत्ती बन रहीं है। यमुना की तलहटी वाले क्षेत्रों का हाल खराब है।
बारिश नहीं होने से फसल बर्बाद तो नहीं हुई है लेकिन कितना असर पड़ेगा, इसकी क्षेत्रीय स्टाफ से रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा। एक पखवाड़े से बारिश नहीं होने का असर दिखाई देने लगा है।
अखिलेश पांडेय
जिला कृषि अधिकारी फीरोजाबाद।