जसराना। मौत के कुएं में दो युवकों की मौत से पूरे गांव को सदमा लग गया है। ग्रामीणों ने गांव में चल रहे भागवत के आयोजन को निरस्त कर दिया। मृतक की पत्नी का रो- रोकर बुरा हाल है। वहीं दैवीय आपदा न होने के कारण प्रशासन मृतकों के परिवारों की कोई मदद नहीं कर रहा है। ग्रामीणों ने शासन से मदद दिलाने की गुहार लगाई है।
गांव फरीदा में भागवत आयोजन के लिए तीन सालों से बंद कुएं को मंगलवार को ग्रामीण साफ करा रहे थे। गंदगी निकालने के लिए गांव के 25 वर्षीय वीनेश एवं 18 वर्षीय अनिल नीचे गए। कुएं में दम घुटने से उनकी मौत हो गई। पूरे गांव में सन्नाटा फैल गया। ग्रामीणों ने बिना पीएम के ही अंतिम संस्कार कर दिया। हादसे के दूसरे दिन गांव में चूल्हे नहीं जले। गांव में होने वाली भागवत कथा को निरस्त कर दिया। वहीं लोग शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं। मृतक युवकों के परिवार को कोई भी सहायता नहीं मिलने से ग्रामीण दुखी और आक्रोशित हैं।
उठ गया परिवार का सहारा
मृतक वीनेश की शादी छह वर्ष पूर्व विनीता के साथ हुई थी। उसके दो बच्चे हैं। बच्चों के सिर से जहां पिता का साया उठ गया। अब बच्चों का पालन करना उसके लिए मुश्किल है। वीनेश छह बहनों एवं तीन भाईयों में सबसे बड़ा था। अनिल तीन भाइयों में छोटा था। जो मजदूरी करके भाईयों को सहारा दे रहा था।
आवेदन करने पर मिलेगी सहायता राशि
तहसीलदार जसराना ने बताया कि दैवीय आपदा न होने के कारण राहत राशि नहीं दे पा रहे हैं। शादीशुदा वीनेश को पारिवारिक मदद योजना का लाभ मिल सकता है। वहीं आवेदन करने पर मुख्यमंत्री राहत कोष से भी मदद मिल सकती है। भूमिहीन होने के कारण किसान दुर्घटना बीमा योजना का लाभ भी नहीं मिलेगा।