फीरोजाबाद। फीरोजाबाद शहर स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछड़ रहा है। जिला अस्पताल में एक भी बर्न एसी रूम नहीं है। वहीं हार्ट केयर सेंटर, चाइल्ड केयर यूनिट, सौ बैड का महिला अस्पताल तक नहीं है। सारी योजनाएं सिर्फ प्रचार- प्रसार तक सीमित रह गईं। मरीज को आगरा, दिल्ली जाकर ही इलाज मिलता है।
सोमवार को विश्व स्वास्थ्य दिवस है। सुहागनगरी में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी मरीजों को अपनी जिंदगी बचाने के लिए आगरा या फिर दिल्ली जाना पड़ता है। मरीजों को गंभीर हालत में जल जाने पर भी एसी रूम जिला अस्पताल में नहीं है। हार्ट केयर यूनिट की स्थापना का काम अभी भी लटका पड़ा है। वहीं चाइल्ड केयर यूनिट, एसी ड्रग स्टोर, सौ बेड का महिला अस्पताल की सुविधा भी फाइलों तक रह गई।
आधा दर्जन चिकित्सकों की कमी
सात सीएचसी, पांच पीएचसी व 54 न्यू पीएचसी खोलकर सरकार ने स्वास्थ्य के लिए इमारतें तो खड़ी कर दी लेकिन ये सिर्फ शोपीस रह गईं। यहां चिकित्सक मौजूद नहीं रहते हैं। आए दिन इसे लेकर विरोध होता है। करीब छह दर्जन चिकित्सकों का यहां अभाव है।
ईएसआई अस्पताल तक नहीं
चुनाव में वादे तो बडे़ बड़े होते हैं लेकिन जीत के बाद जनता को सिर्फ निराशा मिलती है। पिछले चुनाव में कांग्रेस व सपा ने शहर में एक ईएसआई अस्पताल खोलने का वादा किया था लेकिन अभी तक ये सुविधा भी नहीं है।
टीबी अस्पताल की बिल्डिंग में ताला
करोड़ों की की लागत से टीबी के लिए अलग से बनी बिल्डिंग में कोई काम नहीं हुआ। डेढ़ साल से ताला लटका है। डॉट के मरीजों को अलग से भर्ती करने के बजाए सामान्य मरीजों के साथ भर्ती कर लिया जाता है।
जिले में चिकित्सकों की कमी है फार्मासिस्ट सेवाएं दे रहे हैं। सरकारी ट्रामा सेंटर का उद्घाटन 19 फरवरी को करने के बाद कार्यदायी संस्था को 50 प्रतिशत राशि दी गई है लेकिन टेंडर प्रक्रिया आचार संहिता के कारण अटकी है।
सीएमओ, डा. नंद लाल यादव