टूंडला। धर्म-कर्म देखना तो सब चाहते हैं, लेकिन अपने परिवार के लोगों को इससे दूर ही रखते हैं। जैन मुनि देश में बनें यह सभी सोचते हैं लेकिन अपने परिवार से कोई नहीं बने यह प्रयास सभी का रहता है। यदि कोई धर्म-कर्म की ओर जाना भी चाहता है तो हम उसको जाने से रोकते हैं। यह बात नगर के श्रीपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रही धर्मसभा में जैन मुनि अमित सागर ने कही।
उन्हाेंने कहा कि हर व्यक्ति धर्म-कर्म करता तो है, लेकिन वह मात्र दिखावे के लिए होता है। यदि कोई व्यक्ति मंदिर जाता है, गरीबों की मदद करता है या फिर अन्य कोई धर्म का काम करता है तो उसका वह प्रचार करना चाहता है। जबकि धर्म-कर्म का प्रचार करना ही गलत है। प्रचार के लिए किए गए कार्यों का लाभ नहीं मिलता। जैन मुनि ने कहा कि धर्म एक ऐसा शस्त्र है जिससे हम जीवन का उत्थान कर मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। जिस व्यक्ति ने सच्चे व शुद्ध मन से धर्म कार्य को अपना लिया तो उसको जीवन में फि र किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। ऐसे लोगों का जीवन में कोई कुछ बिगाड़ भी नहीं सकता है।