दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, भारौल शाखा के स्टाफ अधिकारी व मुख्य चाबी धारक दिलीप कुमार 27 मई 2026 से बिना किसी पूर्व सूचना के बैंक से लगातार अनुपस्थित चल रहे थे। चूंकि बैंक की सोना रखने वाली तिजोरी (गोल्ड सेफ) दो चाबियों के संयोजन से खुलती है, जिसकी एक चाबी दिलीप कुमार के पास थी, इसलिए उनके गायब होने से काम पूरी तरह ठप हो गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आंचलिक कार्यालय की ओर से जांच के लिए वरिष्ठ प्रबंधक (सुरक्षा) अंकित जान्हू और घिरोर शाखा के वरिष्ठ प्रबंधक सुशील कुमार को 15 जून 2026 को भारौल शाखा भेजा गया। जांच टीम ने घिरोर शाखा में रखी तिजोरी की डुप्लीकेट चाबी मंगवाई। इसके बाद बैंक के पैनल एडवोकेट शिवकुमार शर्मा की मौजूदगी और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में गोल्ड सेफ को खोला गया तो अंदर का नजारा देख जांच टीम के होश उड़ गए। ग्राहकों की ओर से लोन के एवज में गिरवी रखे गए करीब 96 गोल्ड पैकेट सेफ से गायब थे।
इन तीन अधिकारियों पर दर्ज हुई प्राथमिकी
एसएसपी आदित्य लांग्हे ने बताया कि बैंक की आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्य प्रबंधक ने तीन अधिकारियों को आरोपी पाया है। इनमें संदीप यादव (तत्कालीन शाखा प्रबंधक) निवासी ग्राम उमराय, हाल निवासी- 928 प्रोफेसर कॉलोनी, शिकोहाबाद, दिलीप कुमार (स्टाफ अधिकारी/क्रेडिट अधिकारी) निवासी ग्राम बासगांव, पोस्ट राहिन, बकेवर, जिला इटावा और नरेश कुमार (स्टाफ अधिकारी) निवासी ग्राम रायपुरा करकोली, सादाबाद, जिला हाथरस शामिल हैं। इन तीनों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।