फिरोजाबाद। चूड़ी जुड़ाई श्रमिकों की हड़ताल के बीच काफी संख्या में श्रमिक अब काम पर लौटने लगे हैं। लेकिन कारोबार पटरी पर नहीं लौटा है। 31 दिनों से चूड़ी का कारोबार अस्त-व्यस्त है। कहीं काम चल रहा है तो कहीं काम थमा हुआ है। प्रशासन कई श्रमिक संगठनों को बुला कर कई बार वार्ता कर चुका है। कारखाना संचालकों के भी लचीला रूख कर लिया है।
15 अप्रैल से शुरू हुई श्रमिकों की हड़ताल का असर श्रमिकों के साथ-साथ चूड़ी व्यापारी, कारखाना संचालक और इस काम से जुड़े अन्य लोगों पर भी पड़ा है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर जुड़ाई श्रमिकों की हड़ताल समाप्त कराने की मशक्कत के कारण कुछ कारखानों में उत्पादन और जुड़ाई के लिए चूड़ी का उठान भी शुरू हो गया है। लेकिन ईद से ठीक पहले चूड़ी उत्पादन पटरी पर नहीं होने के कारण चूड़ी स्टॉक संचालक, छोटे-बडे चूड़ी गोदाम स्वामी एवं ट्रांसपोर्टर्स आदि भी प्रभावित हैं।
कई कारखानों में चू़डी उत्पादन पकड़ रहा गति
हड़ताली जुड़ाई श्रमिकों को काम पर वापस लौटाने के लिए जिला प्रशासन, श्रम विभाग एवं सेवायोजकों की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर श्रमिक काम पर लौटने लगे हैं। एक दर्जन कारखानों में चूड़ी उत्पादन भी शुरू हो गया है।
समझौता वार्ता के बाद जुड़ाई श्रमिक काम पर लौटने को तैयार हैं। लेकिन कुछ लोग उन्हें रोक रहे हैं। श्रमिक काम पर लौटें भविष्य में समस्या नहीं होने पर आपसी बातचीत के रास्ते खुले हैं। जुड़ाई श्रमिकों के हितों पर कुठाराघात नहीं होगा।
हनुमान प्रसाद गर्ग, अध्यक्ष दी ग्लास सिडिंकेट
चूड़ी स्टॉक हुए खाली
स्टॉक में माल नहीं है। दुकानदारों के आर्डर पूरे नहीं हो रहे। कामकाज ठप है तो दैनिक खर्चों की भरपाई भी नहीं हो रही। जुड़ाई श्रमिक पुराना हिसाब तो कराने आ रहे हैं। नई जुडाई उठाने में आनाकानी कर रहे हैं।
मुहम्मद मसीहउद्दीन, चूड़ी स्टॉक संचालक
15 दिन से चूड़ी लोडिंग ठप
पंद्रह दिन से एक भी चूड़ी की गाड़ी लोड नहीं हुई है। झारखंड ,बिहार एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश में ईद पर चूड़ी की सर्वाधिक मांग रहती है। ट्रांसपोर्ट पर काम करने वाली लेबर हाथ पे हाथ धरे बैठे हैं।
प्रशांत भारद्वाज, ट्रांसपोर्टर