फिरोजाबाद/शिकोहाबाद। एक सप्ताह बाद भी आईफ्लू का प्रकोप कम नहीं हुआ है। हर घर में कोई न कोई इसकी चपेट में है। सोमवार को मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में 280 मरीज पहुंचे, इसमें 200 मरीज आईफ्लू से पीड़ित थे। शिकोहाबाद अस्पताल में 640 नेत्र रोग के मरीज पहुंचे, तीन चिकित्सक मरीजों को देखने में व्यस्त रहे।
बारिश के मौसम में अस्पतालों में वायरल बुखार, त्वचा रोगों के साथ ही सबसे अधिक मरीज आईफ्लू के पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा शिकार बच्चे हो रहे हैं। डॉक्टर दवाई देने के साथ ही साफ सफाई रखने और संक्रमित व्यक्ति से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। स्वशासीय मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में एक हफ्ते पहले तक रोजाना अमूमन 50 से 60 मरीज आईफ्लू के पहुंच रहे थे। वर्तमान में मरीजों की संख्या 200 तक पहुंच गई।
डॉ. राकेश यादवेंदु ने बताया कि मरीज को दवा देने के साथ ही सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बरसात में अक्सर यह बीमारी फैलती है। ग्रामीण इलाकों में भी आईफ्लू तेजी से फैल रहा है। स्कूलों में बच्चों के एक-दूसरे के संपर्क में आने से बीमारी फैल रही है। खैरगढ़, एका, धनपुरा, टूंडला सहित अन्य सीएचसी पर बड़ी संख्या में मरीज आईफ्लू से पीड़ित पहुंच रहे हैं। खैरगढ़ सीएचसी पर आईफ्लू से पीड़ित मरीजों की कतार लगी रही। शिकोहाबाद अस्पताल में सोमवार को सुबह आठ बजे से ही पर्चा खिड़की पर पर्चा बनवाने वालों की भीड़ रही। चिकित्सक डॉ. मोहित सिंघल के कक्ष एवं डॉ. मोहित के अलावा नेत्र परीक्षण अधिकारी डॉ. दीपक तिवारी भी मरीजों को देखने में व्यस्त रहे। सोमवार को नेत्र विशेषज्ञ की ओपीडी 640 के मरीज पहुंचे। इसमें आई फ्लू के साथ आंखों में जलन, पानी आना, इंफेक्शन के थे।
आंखों पर काला चश्मा, जेब में आई ड्राप
आईफ्लू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। बच्चा, बूढ़ा, जवान अधिकतर आंखों पर काला चश्मा तथा जेब में आई ड्राॅप लिए नजर आ रहे हैं। आईफ्लू से दुधमुंहे बच्चे तक भी नहीं बच पाए हैं। चिकित्सकों के मुताबिक आईफ्लू बीमारी केवल तीन दिन तक रहती है, इसके बाद ठीक हो जाती है।
इस वजह से फैलता आईफ्लू
नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. राकेश यादवेंदु ने बताया कि कम तापमान और हाई ह्यूमिडिटी की वजह से लोग बैक्टीरिया, वायरस और एलर्जी के संपर्क में आते हैं। यही एलर्जिक रिएक्शन्स और आई इन्फेक्शन जैसे कंजंक्टिवाइटिस का कारण बनते हैं। आंखों में खुजली या सूजन होने का मतलब है कि कंजंक्टिवाइटिस है।
यह बरते सावधानी
-मरीज को आइसोलेट रखें
-उसकी टॉवल-पिलो अलग रखें
-घर में तीन से पांच दिन अलग रहने की सलाह दें
-आंखों से छूने से बचाने के लिए चश्मा लगाए रहें
-साफ सफाई का ध्यान रखें