छह सूत्रीय मांगों को लेकर अधिकारी, कर्मचारियों ने की एक दिवसीय हड़ताल
बैंकों की हड़ताल से 100 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ। छह सूत्रीय मांगों को लेकर बैंक अफसर, कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ हुंकार भरी।
राष्ट्रीय संगठन के आह्वान पर सभी बैंक अधिकारी आगरा गेट स्थित ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स पर एकत्रित हुए। संगठन के एचएल गौतम, मतलूब अली ने सरकार से जनविरोधी नीतियों को तत्काल रोकने की मांग की। बरखा दुबे, संध्या पाठक, प्रतिभा सिंह ने बैंक कर्मचारी विरोधी नीतियों की आलोचना करते हुए बंद करने की मांग की। प्रशांत त्रिपाठी, राहुल सिंह ने स्टेट बैंक में सहयोगी बैंकों का विलय रोकने की मांग की। यूपी बैंक इम्पलॉइज यूनियन के जिला सचिव अशोक माहेश्वरी ने कहा कि अधिकारी, कर्मचारी अपना वेतन कटवाकर मोदी सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के एकजुट हुए हैं। अध्यक्ष महेश गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
बैंक यूनियन की यह हैं प्रमुख मागें
-कामगार विरोधी श्रम सुधारों को रोकने
-जनविरोधी बैंकिंग सुधारों को रोकने
-एसबीआई के साथ सहयोगी बैंकों का विलय रोकने
-कारपोरेट ऋण बकायेदारों द्वारा जनता के धन की लूट को रोकने
श्रमिकों के हक को भरी हुंकार, जुलूस निकाल सौंपा ज्ञापन
कांच उद्योग क्रांतिकारी मजदूर संघ के बैनर तले मेडिकल रिप्रजेंटेटिव और श्रमिकों ने गांधी पार्क से जुलूस निकालकर हुंकार भरी। प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लेबर कालोनी स्थित श्रम कार्यालय पहुंचे। यहां श्रम प्रवर्तन अधिकारी एसपी पांडे श्रमिकों की समस्याओं के निदान को ज्ञापन सौंपा गया। का. नवल सिंह एडवोकेट ने कहा कि श्रम कानून का कड़ाई से पालन कराया जाए। मंत्री भूरी सिंह यादव ने कहा कि ऑटोमेटिक कारखानों में ठेका प्रथा बंद कराई जाए। महंगाई के अनुसार श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी मिले। इस दौरान प्रभुदयाल प्रजापति, ग्रीश चंद्र, प्रमोद गर्ग, शकीना, रामदेव राठौर, रमेश राजपूत, सोनेश कुमार चक, कृष्णमोहन चक्रवर्ती, सत्यप्रकाश झा, दिनेश शंखवार, पुत्तू सिंह राठौर आदि मौजूद रहे।
अधिवक्ताओं की हड़ताल से न्यायिक कार्य प्रभावित
भ्रष्टाचार के खिलाफ जसराना में चल रहे आंदोलन के समर्थन में सदर तहसील के अधिवक्ताओं ने भी हड़ताल की। अधिवक्ताओं की हड़ताल के चलते न्यायिक कार्य प्रभावित रहे। तहसील पहुंचे वादकारियों को बैरंग लौटना पड़ा।