फिरोजाबाद। माध्यमिक एडेड विद्यालयों में 20 वर्षों से सेवा कर रहे तदर्थ शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। जिले में 10 शिक्षक भी शामिल हैं। उच्च न्यायालय के निर्देश पर विभाग की ओर से शिक्षकों के बकाया देयकों को देते हुए सेवा समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।जिले में 59 अशासकीय माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें वर्ष वर्ष 2020 तक विद्यालय में शिक्षकों के रिक्त पद होने पर निर्धारित आर्हता रखने वाले अभ्यार्थी को तदर्थ शिक्षक के रूप में प्रबंधक की ओर से जिला विद्यालय निरीक्षक के अनुमोदन पर तैनात किया जाता था। माध्यमिक शिक्षा चयन आयोग से शिक्षक की तैनाती होने पर शिक्षकों को हटाने का प्रावधान था। तदर्थ शिक्षकों को नियमित शिक्षक के समान ही वेतन दिया जाता था।
एडेड विद्यालय में तदर्थ शिक्षक तैनात रहे इसलिए अधिकांश विद्यालयों से बोर्ड को अधियाचन नहीं भेजा जाता था। इससे कई तदर्थ शिक्षक सेवानिवृत्त भी हो गए। वर्ष 2020 में सर्वोच्च न्यायालय ने तदर्थ शिक्षकों की तैनात को अवैध करार दिया था और उनको हटाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के निर्देश पर प्रदेश सरकार की ओर से शिक्षकों को एक मौका दिया गया था कि वह चयन बोर्ड की ओर से आयोजित परीक्षा में शामिल हो और जिसमें उनको वरीयता दी जाएगी। इसमें अधिकांश शिक्षक पास नहीं हो सके।
वर्ष 2020 से शिक्षकों के वेतन का भुगतान रुका हुआ है। 10 नवंबर को अपर शिक्षा निदेशक की ओर से पत्र जारी कर सभी तदर्थ शिक्षकों की सेवा समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में उनके नियमित वेतन मिलने तक देयकों का भुगतान करने को भी कहा गया है। जिले के पांच विद्यालयों में वर्तमान में दस तदर्थ शिक्षक तैनात हैं। इसमें कोई 20 वर्ष से तो कोई उससे अधिक समय से शिक्षण कार्य कर रहा था। अब इन शिक्षकों को विद्यालय छोड़ना होगा। जिला विद्यालय निरीक्षक निशा अस्थाना ने बताया कि विभागीय निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।हमने स्कूलों से सूचना मांगी है। इन शिक्षकों की सेवा समाप्ति के आदेश शासन से आ गए हैं।