फतेहपुर। बदसलूकी के विरोध पर अनुसूचित जाति की विवाहित महिला को केरोसिन डालकर जलाकर मार डालने के मामले में युवक को एससी-एसटी कोर्ट के न्यायाधीश अनिल कुमार ने आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
किशनपुर थाने के रायपुर भसरौल गांव के बहियापुर निवासी लक्ष्मी देवी दो अगस्त 2020 को घर में अकेली थी। गांव का मनोज दुबे उसके घर पहुंचा था। महिला से बदसलूकी करने लगा था। विरोध करने पर महिला को केरोसिन डालकर जला दिया था। मौके से भाग निकला था। महिला का ससुर कुछ देर बाद घर पहुंचा था। उसने बहू को जलता देखकर कंबल डालकर आग बुझाई। बहू ने आपबीती में ससुर दुर्गा को बताया कि मनोज दुबे ने उसे केरोसिन डालकर आग लगाया है। ससुर दुर्गा ने मनोज दुबे के पास पहुंचकर शिकायत की। पुलिस कार्रवाई न करने की बात पर मनोज ने लक्ष्मी का इलाज कराने का आश्वासन दिया। महिला को खागा सीएचसी ले गए। जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल से परिजन प्रयास नर्सिंग होम ले गए। कुछ दिन बाद मनोज चला गया। आर्थिक तंगी पर परिजन उसे घर ले गए। महिला की हालत बिगड़ने पर खागा सीएचसी ले गए। सीएचसी में नायब तहसीलदार ने महिला का मृत्यु पूर्व बयान अंकित किया। फिर से महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के करीब दो माह बाद महिला की मौत हो गई थी। पुलिस ने महिला के गढ़ा गांव के रग्घुपुर निवासी भाई दशरथ की तहरीर पर मनोज के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट व गैरइरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। आरोपी को जेल भेजा था। आरोपी चार साल से जिला कारागार में निरुद्ध है। कोर्ट ने बुधवार को मामले की अंतिम सुनवाई की। मृतका के पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार उत्तम व अजय कुमार सिंह ने कोर्ट में दलील व 12 साक्ष्य प्रस्तुत किए। कोर्ट ने मनोज दुबे को दोषी करार देकर आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।