केन नदी के दबाव से यमुना नदी उफना गई है। यमुना के तेज बहाव से रविवार को कोर्रा ग्राम पंचायत का हड़ाही मजरा नदी की आगोश में समा गया। मैनाही गांव में भी तेजी से कटान शुरू है। बाढ़ के खतरा से इन गांव के ग्रामीण शनिवार की शाम को ही पलायन कर ऊपर के एक बाग में बस गए हैं। लोगों ने पशुओं को आजाद कर दिया है। पीड़ित परिवार को राहत के लिए राजस्व टीम सुबह से रिपोर्ट तैयार कर रही है।
मध्य प्रदेश में हुई बारिश का असर केन नदी के जरिये अब यमुना में दिखाई दे रहा है। 24 घंटे में यमुना नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। ओती का मजरा पलटू का पुरवा में चारों ओर बाढ़ का पानी भर गया है। कस्बा और मुख्यालय से ग्रामीणों का संपर्क टूट गया है। खबर लिखे जाने तक ग्रामीणों को गांव से बाहर निकालने की कोई व्यवस्था नहीं हुई है। टापूृ बने गांव में लोग दहशत में हैं।
यमुना के विकराल रूप में सैकड़ों बीघा तटवर्ती जमीन को नदी निगल चुकी है। ललौली मजरा और उसके कई मजरा भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। ललौली से मुत्तौर संपर्क मार्ग के ऊपर से यमुना का पानी बहा रहा है। बाइक सवार और पैदल जाने वाले राहगीर नाव के सहारे निकल रहे हैं। ट्रक, विक्रम व अन्य हल्के वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। बहुआ कस्बा से घूम कर लोगों को जाना पड़ रहा है।
सड़क पर बह रहे पानी में बाइक समेत चार बहे- फतेहपुर। यमुना के बाढ़ पीड़ितों के हाल जानने के लिए कोर्रा ग्राम पंचायत के मजरा डड़ियार के सपा नेता बबलू सिंह, रामप्रताप सिंह, राजू और फन्नू सिंह दो बाइक से ललौली-मुत्तौर मार्ग जा रहे थे। अचानक नदी के बहाव में फंस कर बहने लगे। गहराई में पहुंचते ही चारों बाइक सवार बाइक छोड़ तैरते हुए बाहर निकल आए। बाद में जाल डालकर बाइकों को निकाला गया।
बाढ़ से ससुर खदेरी व कई नाला उफनाए- फतेहपुर। यमुना नदी के उफान का पानी ललौली से कोट तक कई संपर्क मार्गों को प्रभावित कर दिया है। इससे कई गांवों का संपर्क टूट गया है। नालों में नाव लगी हुई हैं। इन्हीं के माध्यम से ग्रामीणों का कस्बा व तहसील, जिला मुख्यालय आवागमन हो रहा है। कोर्रा से देवरी मार्ग पर यमुना के बाढ़ का पानी भर गया है।
इसी प्रकार मुत्तौर से ललौली मार्ग, डड़ियार से ओती मार्ग में सड़क के ऊपर से पानी बह रहा है। इसी प्रकार खागा तहसील के किशनपुर क्षेत्र के असहट नाला में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। नाला के दोनों ओर किसानों के खेतों में पानी भर गया है। किशनपुर-एकडला मार्ग के दमहा नाला ने विकराल रूप धारण कर लिया है। कोट-खखरेरु मार्ग व कुल्ली मलूकबारी मार्ग पर ससुर खदेरी नदी पुल के ऊपर से पानी बह रहा है। लोग नाव के सहारे से आवाजाही कर रहे हैं।
इन गांवों का संपर्क टूटा- कछरा, मलूकबारी, बरहा, रग्घूपुर, अर्जुनपुर, मैनापर, चंदापुर, नरौली, मडैयन, कोट, असहट, लोहनपुर, खलवा, टिकुरा, रारी, गुरवल, गढ़ीवा, मझगवां, बिकौरा, जलंधरपुर, धाना, गिरधरपुर, मठेठा, एकडला, गंज, मैनाही, ओती, ओनई, भूप का डेरा, कबरी घाट, धोबिया, सेलखरा, डड़ियार, देवरी कोर्रा, दसौली, उरौली गांव का आसपास के कस्बों से संपर्क टूट गया है।
छह परिवार का था हड़ाही मजरा- फतेहपुर। यमुना की आगोश में समाने वाले कोर्रा के हड़ाही मजरे में छह परिवार रहते थे। राजस्व टीम के मुताबिक 50 लोगों का मजरा रहा है। ग्राम समाज की जमीन चिंह्ति कर सभी पीड़ित परिवारों को आवास के लिए जमीन दी जाएगी।
क्या कहते हैं जिम्मेदार- एडीएम आलोक सिंह ने बताया कि बाढ़ चौकियां और शिविर तटवर्ती क्षेत्र में लगे हुए हैं। सभी एसडीएम को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने के लिए निर्देश दिया गया है। अभी तक किसी प्रकार के नुकसान की रिपोर्ट नहीं है। यमुना नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से अभी नीचे हैं।
चिल्ला पुल बंद, कई जिलों से संपर्क टूटा- फतेहपुर। बाढ़ के बहाव को देखते हुए रविवार रात चिल्ला पुल पर आवागमन बंद कर दिया गया। पुलिस ने दोनों तरफ बैरीकेडिंग लगा दी है। इससे बांदा से कानपुर, लखनऊ, मध्य प्रदेश से संपर्क टूट गया है। बांदा रूट की बसों को बहुआ होकर भेजा जा रहा है।
एसडीएम ने नौबस्ता गंगा घाट का किया निरीक्षण- खागा। बरसात से उफनाई गंगा यमुना नदी की बढ़ रहे जलस्तर को लेकर एसडीएम अमित भट्ट ने नौबस्ता गंगा घाट का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि यमुना नदी के जलस्तर से अभी तक कोई भी गांव प्रभावित नहीं हुआ है। केवल रास्ते ही अवरुद्ध हुए हैं। यमुना के एकडला गांव की ओर जाने वाले दमहापुल, असहट से किशनपुर और किशनपुर से पहाड़पुर को जाने वाले रास्तों में ही यमुना नदी का पानी भरा हुआ है। जिससे ग्रामीणों को आवागमन में समस्या पैदा है।