फतेहपुर। शब-ए-बरात यानी मगफिरत की रात का पर्व मुस्लिम समुदाय ने बड़े ही धूम धाम से मनाया। मुस्लिम समुदाय के लोग हर साल शाबान के महीने की 15वीं तारीख को शब ए बरात का पर्व मनाते हैं। ये दो शब्दों से मिलकर बना है। शब का मतलब होता है रात और बरात का मतलब होता है बरी करना।
इस रात समाज के लोगों ने पूरी रात अल्लाह की इबादत की। कुरान की तिलावत करते हुए अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगी। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मस्जिदों, दरगाहों, कब्रिस्तानों और घरों में रोशनी से सजावट की। धार्मिक जलसों का आयोजन किया। इस दिन मुस्लिम समुदाय लोग अपने पूर्वजों की कब्र में जाकर साफ-सफाई कर मोमबत्ती जलाई और मजारों में फूल डालकर उनके लिए दुआ मांगते नजर आए। शहर के साथ साथ बिंदकी, बहुआ, खागा, हुसैनगंज, धाता, ललौली समेत जिले के सभी कस्बों और गांवों में मुस्लिमों ने कब्रिस्तानों को रोशन करने के साथ-साथ अपने बुजुर्गों की कब्रों में जाकर दुआएं मांगी।