संक्रामक और मच्छरजनित बीमारियों से चौबीस घंटे के भीतर छह मौतें हो गईं। खजुहा पीएचसी के कोरवां गांव की डेंगू पीड़ित महिला ने कानपुर स्थित एक नर्सिंग होम में दम तोड़ दिया। हंसवा पीएचसी के गेड़ुरी गांव में बुखार से तीन, असोथर पीएचसी के सुजानपुर गांव में एक अधेड़ और सदर अस्पताल में खागा की एक मासूम की बुखार से मौत हो गई।
बिंदकी प्रतिनिधि के मुताबिक खजुहा पीएचसी के कोरवां गांव के नजबुद्दीन की पत्नी आबिदा(35) को बुखार आ रहा था। कानपुर के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। जांच में डेंगू ग्रसित होने की पुष्टि हुई थी जिसकी शुक्रवार सुबह मौत हो गई। कोरवां गांव में यह तीसरी मौत है, दर्जनाें लोग बुखार से जूझ रहे हैं।
असोथर प्रतिनिधि के मुताबिक हंसवा पीएचसी क्षेत्र का गेड़ुरी गांव भी संक्रामक रोग की चपेट में है। गांव के खन्ना(65) को पांच दिन से बुखार आ रहा था। कानपुर के वंदना हास्पिटल में गुरुवार रात उसकी मौत हो गई। राम बाबू के बेटे रामू (12) को तीन दिन पहले वायरल फीवर हुआ था। परिजनों ने बुधवार को सदर अस्पताल में भर्ती कराया। गुरुवार को हालत सुधरने पर घर ले आए। रात में सांसें थम गईं। इसी गांव के शिवदत्त की पत्नी सरिता (45) को भी चार दिन से बुखार था। इलाहाबाद के कमला नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुरुवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इसी प्रकार असोथर पीएचसी के सुजानपुर गांव के सुंदर (65) को हफ्ते भर से बुखार आ रहा था। वह झोलाछाप से इलाज करा रहे थे। इनकी भी गुरुवार को मौत हो गई।
उधर, खागा सीएचसी के तेऊजा गांव के रमेश चंद्र की बेटी अनामिका (5) को तीन दिन से बुखार था। मां मोना देवी उसे गुरुवार को इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर आ रही थी। थरियांव कस्बे में बुखार से तपती मासूम पर 108 नंबर एंबुलेंस के एक जवाबदेह की नजर पड़ गई। जिसके बाद उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया लेकिन किशोरी की जिंदगी नहीं बचाई जा सकी।