श्रीमद् भागवत अमृत वर्षा में श्रद्धालु भीग रहे हैं। पंडित भरत भाई बाजपेयी ने ईश्वर को सत्य का रूप बताया। संसार में किसी भी धर्म या संप्रदाय को मानने वाला अपने ईष्ट को सत्य मानता है इसलिए वेद व्यास ने मंगलाचरण में सत्य रूप ईश्वर का ध्यान किया है।
खुशवक्तराय नगर में कथा को प्रारंभ करते हुए व्यास ने दुर्योधन की पराजय का वर्णन करते हुए यह बताने का प्रयास किया कि हम चाहे जितने भी धनवान यशवान वैभववान हों लेकिन यदि अधर्म के मार्ग पर चलेंगे तो विनाश हो जाएगा।
ध्रुव प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब कोई सद् संकल्प करते हैं तो संपूर्ण प्रकृति संकल्प को पूर्ण करने में जुट जाती है। हर तरफ से निराश ध्रुव को जब भगवान नारायण की कृपा मिल गई तो सभी लोग ध्रुव के सामने नत मस्तक हो गए।
उन्होंने कहा कि संसार की कृपा पाने के लिए पहले ईश्वर की कृपा पाना आवश्यक है। श्रीमद् भागवत को विचार ग्रंथ बताते हुए कहा कि जब तक विचार शुद्ध नहीं होंगे तब तक आचार की शुद्धि नहीं होगी।
कथा में मधुसूदन दीक्षित, उज्जैन सिंह, अनंत दीक्षित, उदयनाथ गौतम, प्यारेलाल सिंह, अंबिका गुप्त, संजय मिश्र, विजय पाल, राजेंद्र दीक्षित आदि लोग मौजूद रहे।