मौसम की बेरुखी का असर अब आम लोगोें को रुलाएगा। कभी सूखा तो कभी बेमौसम बारिश से फसलों की पैदावार में लगातार कमी हो रही है। इस बार रबी की फसल में पर्याप्त ठंड न पड़ने और फरवरी माह से ही गर्मी ने गेहूं की फसल को कमजोर कर दिया है। समय से पहले गर्मी पड़ने से मार्च के पहले पखवारे में ही गेहूं सूख गई है, जिसको समेटने में किसान जुट गए हैं। इससे करीब 15 से 20 फीसदी गेहूं की पैदावार में गिरावट होने के संकेत हैं। गेहूं में कमी आने से रोटी की कीमत और बढ़ जाएगी, जिसका असर आम लोगों पर अधिक पड़ेगा।
गेहूं के फसल की बुआई से ही मौसम फसल के विपरीत रहा है। सूखा की वजह से खेत की मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं रही। नवंबर से जनवरी तक पड़ने वाली ठंड भी पर्याप्त असर नहीं दिखा सकी है, जिससे गेहूं की पौध भी आशा के अनुरूप नहीं रही।
मार्च में हो रही गर्मी ने गेहूं की फसल को एकदम से सुखा दिया, जिससे बालियों के अंदर का दाना सिकुड़ गया है। ऐसी दशा में गेहूं की पैदावार में 20 फीसदी तक कमी होने की संभावना है। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो जिले में एक लाख 75 हजार 193 हेक्टेयर में गेहूं की बुआई है, जिसमें छह लाख 55 हजार 895 मीट्रिक टन पैदावार का लक्ष्य है।
जबकि पिछले वर्ष एक लाख 72 हजार 246 हेक्टेयर में गेहूं की बुआई हुई थी, जिसमें बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि से मात्र तीन लाख 41 हजार 436 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। जिला कृषि अधिकारी रविकांत सिंह ने बताया कि मौसम की बेरुखी का असर गेहूं के उत्पादन में रहेगा, लेकिन पिछले वर्ष की भांति इस साल अच्छी पैदावार होगी।