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Fatehpur News: बापू वाटिका पर जंगली घास का कब्जा, गांधी चबूतरे का मिटा अस्तित्व

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फोटो-10-बहुआ ​स्थित बापू वाटिका बदहाल। संवाद
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बहुआ। खजुहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत अजमतपुर में वर्ष 1970 में बनी बापू वाटिका और गांधी चबूतरा बदहाल हैं। देखरेख के अभाव में वाटिका जंगली घास और झाड़ियों से घिर गई है, जबकि गांधी चबूतरे का अस्तित्व तक मिट चुका है। शुक्रवार को गांधी जयंती है, लेकिन जिम्मेदारों ने अब तक वाटिका की सुध नहीं ली है।
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और अजमतपुर के तत्कालीन प्रधान सुखनंदन सिंह ने वर्ष 1970 में बापू वाटिका और गांधी चबूतरे का निर्माण कराया था। दो अक्तूबर 1970 को तत्कालीन खजुहा ब्लाॅक प्रमुख रामस्वरूप ने इसका उद्घाटन किया था। सुखनंदन सिंह के बाद वाटिका की देखरेख पर किसी जिम्मेदार का ध्यान नहीं गया।
वाटिका में स्थापित गांधी प्रतिमा का रंग-रोगन तो दूर, लंबे समय से साफ-सफाई तक नहीं कराई गई। प्रतिमा के आसपास गंदगी और जंगली घास खड़ी है। गांधी के स्वच्छता संदेश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के बावजूद वाटिका की स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
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मवेशी बांधने लगे ग्रामीण
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुखनंदन सिंह के बेटे सज्जन सिंह ने बताया कि पिता महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित थे। उन्होंने गांधी के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से बापू वाटिका बनवाई थी। जिम्मेदारों की उदासीनता से वाटिका जर्जर और बदहाल हो गई है। बगल में स्थित गांधी चबूतरे पर ग्रामीण मवेशी बांधने लगे हैं। गांधी जयंती पर भी प्रतिमा पर माल्यार्पण और साफ-सफाई होगी या नहीं, इसको लेकर सवाल खड़ा है।

फोटो-10-बहुआ स्थित बापू वाटिका बदहाल। संवाद

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