फतेहपुर। मायके जाने की जिद को लेकर हुए विवाद में पति को जिंदा जलाने के मामले में कोर्ट ने पत्नी और साले को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। न्यायाधीश अजय कुमार सिंह प्रथम ने पत्नी और साले को 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। वहीं दिवंगत की सास जयरानी को दोषमुक्त कर दिया गया है।
चांदपुर थाना क्षेत्र के भगलापुर गांव निवासी शिवमंगल के पुत्र अरुण कुमार की शादी बकेवर थाना क्षेत्र के नहरामऊ गांव निवासी नीलम देवी के साथ हुई थी। तीन अप्रैल 2014 को अरुण का साला सर्वेश पुत्र के मुंडन संस्कार के लिए परिवार के साथ ट्रैक्टर से भगलापुर स्थित मंदिर आया था। कार्यक्रम में नीलम के भाई राजू डांसर और मां जयरानी भी शामिल हुई थीं।
कार्यक्रम के बाद नीलम ट्रैक्टर से मायके जाने लगी तो अरुण ने उसे जाने से मना कर ट्रैक्टर से उतार लिया। इसे लेक अरुण और नीलम के परिजन के बीच विवाद हो गया। नीलम के भाई राजू डांसर ने इसकी शिकायत थाने में की थी। इसके बाद दोनों पक्षों को थाने बुलाया गया। समझौते के बाद नीलम, पति अरुण और भाई राजू डांसर के साथ कपड़े लेने घर पहुंची थी।
इसी दौरान अरुण के पिता शिवमंगल भी थाने से घर पहुंचे। घर पहुंचने पर उन्होंने कमरे से धुआं निकलते देखा। अंदर जाने पर अरुण रस्सी से बंधा हुआ जली हालत में मिला। पिता ने बताया कि पूछताछ के दौरान अरुण ने बताया था कि पत्नी नीलम और साले राजू डांसर ने तेल डालकर आग लगा दी है। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया था। कोर्ट ने छह गवाहों के बयान सुनने के बाद बुधवार को अंतिम फैसले में नीलम और राजू डांसर को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।