रामगंगा नहर के निचले हिस्से में भरा पानी
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जिले की रामगंगा व निचली गंगा नहर में पानी तलहटी में पहुंच गया है। इससे रजबहा और माइनरों के कुलाबों में पानी नहीं जा पा रहा है। इन दिनों खेतों में पानी की जरूरत नहीं है लेकिन पशु-पक्षियों के लिए पानी का संकट पैदा हो गया है।
जून माह में पर्याप्त बारिश न होने से जिले के अधिकतर तालाब सूखे हैं। शासन ने जिलेे को सूखा घोषित किया है। इसके बाद भी किसी तरह की सुविधा नहीं दी गई। सरकारी नियमों के मुताबिक खरीफ फसल का रोस्टर 31 मार्च को खत्म हो जाता है। लिहाजा नहर के पानी को बंद कर दिया गया है।
इससे इन दिनों 1100 क्यूसेक क्षमता वाली नहर में मात्र 300 क्यूसेक पानी चल रहा है, जो माइनरों के कुलाबों तक भी नहीं पहुंच रहा है। आसपास के तालाब भरे नहीं जा पा रहे हैं। बता दें कि तालाब नलकूप और नहर दोनों माध्यम से भरे जाते हैं। ग्रामीणों को तालाब भरा होने से पशुओं को पानी पिलाने की सुविधा मिल जाती है।
साथ ही गर्मी से निजात के लिए भी वह इसका उपयोग करते हैं। दूसरी ओर खुला घूमने वाले पशु-पक्षियों के लिए पेयजल संकट पैदा हो गया है। अब सरकारी नियमों के मुताबिक रबी का रोस्टर एक अप्रैल से जारी होता है लेकिन अभी तक यह जारी नहीं हुआ है।
यदि यह जारी हो जाता तो यह तय हो सकता था कि जिले को नहर से कितना पानी मिलना है। इसके बाद नहर को खुलवाकर क्यूसेक वाइज पानी की सप्लाई की जाती। अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड ओपी चौधरी ने कहा कि रबी व खरीफ फसल में जिले के पानी का रोस्टर शासन स्तर से तैयार किया जाता है। रामगंगा व निचली गंगा नहर के पानी का रोस्टर लागू होते ही नहरों में पर्याप्त पानी छोड़ा जाएगा।