शोपीस बनी थरियांव की पानी टंकी
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जल निगम की ग्रामीण पेयजल योजना लोगों के लिए छलावा साबित हो रही है। थरियांव में चार साल पहले बना ओवरहेड टैंक व नलकूप शोपीस बना है। कस्बे व मजरों मेें अभी तक जलापूर्ति शुरू नहीं हुई है। नलकूप चलाने के लिए विभाग ने आपरेटर भी तैनात कर दिया है। उधर, उपभोक्ताओं का कहना है कि कागजों में आपूर्ति की जा रही है।
पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए शासन से हर साल करोड़ों रुपये मंजूर होते हैं। फिर भी पेयजल व्यवस्था ज्यों की त्यों है। इस बार की गर्मी में भी लोगों को पेयजल की किल्लत से जूझना पड़ेगा। बता दें कि थरियांव में 2011-12 में बनी पानी की टंकी से अभी तक जलापूर्ति शुरू नहीं हुई। कस्बे के व्यापारियों का आरोप है कि ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों ने मानकविहीन निर्माण कराया है। ओवरहेड टैंक में लीकेज है।
पानी टंकी से कस्बा तक डाली गई पाइप लाइन मानक विहीन है। जलापूर्ति चालू करते ही लीकेज टैंक और पाइप लाइन से पानी बह कर सड़क की पटरी में भर जाता है। व्यापारी सगीर अहमद, लवकुश मोदनवाल ने बताया कि पानी का कनेक्शन लेना है। थरियांव का नाम लेते ही विभागीय अधिकारी कनेक्शन का फार्म नहीं देते हैं। कस्बा तिराहे में पानी की समस्या है। गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत और बढ़ जाती है। अधिशासी अभियंता पीके यादव का कहना है कि पानी की टंकी का काम पूरा हो चुका है। जलापूर्ति के लिए आपरेटर भी तैनात कर दिया गया है। कस्बावासियों को गर्मी में पानी की आपूर्ति की जाएगी।