फतेहपुर। औंग क्षेत्र के गोधरौली, आशापुर, अभयपुर और बनियनखेड़ा गांवों का भूजल रासायनिक प्रदूषण का शिकार हो चुका है। यहां के निवासियों में क्रोमियम व मरकरी के तत्व मिले हैं। इस पर एनजीटी ने चिंता जाहिर की है।
उन्होंने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अब टालमटोल नहीं चलेगा। पानी, स्वास्थ्य और प्रदूषण नियंत्रण की हर सिफारिश पर समय सीमा तय की जाए, इसकी निगरानी स्वयं मुख्य सचिव करें। इसकी अगली सुनवाई एक जुलाई को होगी।
नेशलन ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश के बाद फतेहपुर के औंग क्षेत्र के चार गांवों, कानपुर और कानपुर देहात जनपद में क्रोमियम प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जांच की गई है। कुल 44 लोगों के रक्त की जांच में 32 लोगों के खून में क्रोमियम और एक में मरकरी मिला है। वहीं 40-50 लीटर पानी प्रति व्यक्ति मिलने पर असंतोष व्यक्त करते हुए प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
सर्वे रिपोर्ट में बताया गया कि गांव गोधरौली के 30 परिवार अब भी पानी से वंचित हैं। इसी रिपोर्ट का संज्ञान लेकर एनजीटी ने राज्य सरकार से तत्काल सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पानी की आपूर्ति भी मानक के अनुरूप करने के लिए कहा है। फतेहपुर के गांवों, कानपुर में जाजमऊ, राखीमंडी, रनियां में जल प्रदूषण व क्रोमियम डंपिंग की गंभीर समस्या को लेकर एनजीटी ने राज्य सरकार की कार्रवाई पर असंतोष जताया है।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि अब तक की कार्रवाई में गंभीरता का अभाव है, जबकि यह मामला लोगों की सेहत से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल ने प्रमुख सचिव स्तर तक जिम्मेदारी तय करते हुए मुख्य सचिव को निर्देशित किया कि प्रभावित गांवों में हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 135 लीटर शुद्ध जल उपलब्ध कराया जाए।
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गर्मी की छुट्टी में सूचीबद्ध कर होगी सुनवाई
एनजीटी ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए एक जुलाई की तारीख तय की है। अमिकस क्यूरी को निर्देश दिए हैं कि आवश्यक हो तो गर्मी की छुट्टियों के दौरान भी मामले को सूचीबद्ध करके सुनवाई की जाएगी।
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औंग में भी दूषित पानी की समस्या
औंग कस्बे में भी दूषित पानी की समस्या बढ़ने लगी है। सड़क किनारे के लोग पीने के पानी के लिए कैंपर का इस्तेमाल करने लगे हैं। उन्हें पेट संबंधी बीमारी बढ़ने से चिंता सताने लगी है।