फतेहपुर। आईटीआई रोड में संचालित चिटफंड कंपनी के संचालक निवेशकों के 1.12 करोड़ रुपये हड़प कर भाग निकले। कोर्ट के आदेश पर सोमवार को धोखाधड़ी में कंपनी डायरेक्टर समेत छह संचालकों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
कल्यानपुर थाना क्षेत्र के पिलखनी निवासी सुरेश चंद्र ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि आईटीआई रोड पर जेकेवी लैंड डेवलपर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमटेड कंपनी संचालित थी। इसका प्रधान कार्यालय जानकीपुरम महात्मा गांधी मार्ग हजरतगंज, लखनऊ में है।
कंपनी में लखनऊ सहारा स्टेट निवासी राजेश सिंह और उनकी पत्नी प्रियंका सिंह डायरेक्टर हैं। रोजगार की तलाश में 2010 में एक विज्ञापन देखकर वे स्थानीय कार्यालय पहुंचे। डायरेक्टर राजेश ने उन्हें एजेंट बनाया। एजेंट के रूप में कार्य करते हुए उसने आठ लाख रुपये जमा कराए।
उनके अलावा 17 एजेंटों ने करीब दो सौ लोगों का एक करोड़ रुपया जमा कराया। डायरेक्टर राजेश सिंह ने उन्हें लालच दिया था कि रुपये छह साल में दोगुना होकर मिलेंगे। रुपये बांड और मैच्योरिटी होने पर चेक भी दिया गया था। समय पूरा होने पर भुगतान के लिए पहुंचे तो टरकाया जाने लगा।
कुछ दिन बाद कंपनी बंद कर संचालक भाग गए। इस पर उन्हें धोखाधड़ी का पता लगा। धोखाधड़ी में राजेश सिंह के सहयोगी जौनपुर थाना लाइन बाजार राज कालोनी निवासी दीपक शुक्ला, लखनऊ थाना हसनगंज के खंदरा रूपापुर निवासी दुर्गेश जायसवाल, लखनऊ विकास नगर निवासी विक्रांत त्रिपाठी, प्रयागराज के झूंसी आवास विकास कालोनी निवासी आशीष कुमार श्रीवास्तव शामिल थे। कोतवाल अमित मिश्रा ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की जा रही है।
इन एजेंटों के एक करोड़ से अधिक रुपये डूबे
एफआईआर के मुताबिक करसवां के शन्नो देवी के पांच लाख, जाफरगंज के मुसवापुर बरहट निवासी सुरेंद्र, सुनील कुमार के पांच-पांच लाख रुपये, गाजीपुर के फलवामऊ निवासी अनिरुद्ध कुमार के दो लाख रुपये, सदर कोतवाली के कृष्ण बिहारी नगर निवासी लक्ष्मी के चार लाख रुपये, बिंदकी के प्रतिमा देवी के पांच लाख रुपये, गाजीपुर के दुर्गेंद्र कुमार के 60 हजार रुपये, बड़नपुर के शरदचंद्र के एक लाख 30 हजार, वसीर के 50 हजार रुपये, बिंदकी ओंखरा निवासी कुमार के पांच लाख, जोनिहां बेहटा निवासी देशराज व उनकी पुत्री मंजू कुमारी, पत्नी कृष्णा कुमारंी के 50 लाख रुपये, गाजीपुर के पखरौली निवासी रमेश चंद्र के 12 लाख रुपये, दुगरेई निवासी सुमनलता के एक लाख रुपये, थरियांव के अर्जुन के तीन लाख रुपये, हसवा के रंजीत कुमार के पांच लाख डूबे हैं। ये सभी एजेंट थे और लोगों का निवेश कराया था।