फतेहपुर। छात्रों को टॉपर बनाने में फर्जीवाड़ा सामने आया है। इंटरमीडिएट का अच्छा रिजल्ट पाने के लिए 97 माध्यमिक स्कूलों ने फर्जी आंकड़े यूपी बोर्ड की वेबसाइट में फीड कर दिए। रोल नंबर गलत मिलने पर जब बोर्ड ने छात्र-छात्राओं की पत्रावलियां डीआईओएस कार्यालय लौटाईं और यहां पर इनकी जांच की गई तो सारा खेल खुलकर सामने आ गया।
अभी तक की जांच में पाया गया है कि 97 कॉलेजों ने 217 परीक्षार्थियों के रोल नंबर और अंकों से छेड़छाड़ की। जांच अभी जारी है और फर्जीवाड़ा करने वाले कॉलेजों को नोटिस जारी करने की तैयारी विभाग कर रहा है। रिपोर्ट भी दर्ज हो सकती है।
जिले में राजकीय, एडेड और वित्तविहीन मिलाकर कुल 426 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। कोरोना संक्रमण के कारण शासन ने 2021 की बोर्ड परीक्षा रद्द कर दी है। ऐसे में बोर्ड छात्रों को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने के लिए उनका मूल्यांकन पिछली कक्षाओं की परीक्षा के आधार पर हो रहा है। इसके लिए पिछली कक्षाओं की परीक्षा के अंकपत्र जमा कराने के साथ ही वेबसाइट पर नंबर अपलोड कराए गए थे।
इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों का परिणाम उनकी हाईस्कूल परीक्षा परिणाम पर आधारित होगा। बोर्ड ने इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षार्थियों के हाईस्कूल के रोलनंबर, प्राप्तांक आदि का ब्यौरा अपलोड कराया था। इसमें 97 स्कूलों ने अपने यहां के बच्चों के रोलनंबर और प्राप्तांक आदि में फर्जीवाड़ा किया।
बोर्ड की छानबीन में नाम, अनुक्रमांक का मिलान न होने पर बोर्ड ने जिले को पत्रावलियां लौटा दीं। जिलास्तर पर जब हुई जांच तो पाया गया कि 97 विद्यालयों ने 217 परीक्षार्थियों के शैक्षिक अभिलेखों से छेड़छाड़ की है। जांच अभी चल रही है।
अभिलेखों में ऐसे हुई छेड़छाड़
हाईस्कूल की पिछले कई परीक्षाओं के टॉपरों के रोल नंबर और प्राप्तांक इंटरमीडिएट के छात्रों के नाम से अपलोड किए गए। माता, पिता के नाम भी बदले गए। छात्राओं के स्थान पर छात्र परीक्षार्थियों के नाम अंकित किए गए। डीआईओएस का कहना है कि मिलान में इस तरह की कई गंभीर त्रुटियां पकड़ में आई हैं, जो भूलवश संभव नहीं हैं। यह सब जानबूझकर किया गया प्रतीत हो रहा है।