फतेहपुर। पुलिस हिरासत से भागे आरोपी की मौत के मामले में 18 साल के बाद न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए आरपीएफ के दो पुलिसकर्मियों को शुक्रवार को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने दोनों को दो-दो साल की सजा सुनाई है।
तत्कालीन फतेहपुर जीआरपी एसओ रामविष्णु ने 28 जून 2008 को दर्ज कराए गए मुकदमे में बताया था कि कानपुर में तैनात आरपीएफ के हेड कांस्टेबल रामभारती निवासी ग्राम मोनाई थाना मांडा प्रयागराज और कांस्टेबल रामेश्वर यादव निवासी सौता स्वोढ़ा थाना गिरवां बांदा आरोपी मनोज कुमार को कानपुर न्यायालय में पेशी के बाद कालका मेल के दिव्यांग कोच से प्रयागराज नैनी जेल ले जा रहे थे।
कटोघन पूर्वी केबिन के पास आरोपी ने लघुशंका जाने की बात कही। इस पर दोनों पुलिसकर्मी उसे ट्रेन में बने शौचालय में ले जाने लगे। इस दौरान ट्रेन के दोनों दरवाजे खुले थे। मौका पाकर आरोपी पुलिसकर्मियों को धक्का देकर ट्रेन से कूद गया। सिर में गंभीर चोट लगने से उसकी मौत हो गई।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रही थी। न्यायालय ने खागा तहसीलदार हनुमान सिंह, एसओ रामविष्णु, दरोगा रनवीर सिंह, हेड कांस्टेबल राजेंद्र प्रसाद, चिकित्साधिकारी डॉ. ज्ञान प्रकाश और कांस्टेबल अनिल कुमार शुक्ल की गवाही के आधार पर दोनों पुलिसकर्मियों को लापरवाही का दोषी माना। न्यायालय ने सुनवाई के बाद हेड कांस्टेबल रामभारती और कांस्टेबल रामेश्वर यादव को दो-दो साल की सजा सुनाई।
दोनों पुलिसकर्मी करते रहे डिमोशन की मांग
हेड कांस्टेबल रामभारती और कांस्टेबल रामेश्वर यादव के अधिवक्ता नियमों का हवाला देते हुए दोनों पुलिसकर्मियों को डिमोशन की सजा देने की मांग करते रहे। हालांकि न्यायालय ने गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।