फोटो-11- शुद्ध पेय जल से सेंटर में बाइक धोता कर्मी।
फोटो-12- नगर पालिका के सप्लाई पाइप में लगी मोटर।
- शहर के लगभग 120 धुलाई सेंटर महीने में 75 लाख लीटर पानी बहा रहे व्यर्थ
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। भूगर्भ का जलस्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। लोगों को बूंद-बूंद पानी बचाने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। वहीं शहर में हर दिन वाहन धुलाई के नाम पर बहुमूल्य लाखों लीटर पानी व्यर्थ में बहा दिया जाता है।
शहर में करीब 120 छोटे-बड़े धुलाई सेंटर हैं। इसमें 20 सेंटर ऐसे हैं, जहां रोजाना 50 से 60 वाहनों की धुलाई होती है। इसी तरह अन्य सेंटर में हर रोज लगभग 15 से 20 वाहन धुले जाते हैं। चार पहिया में 120 लीटर व दो पहिया वाहनों में लगभग 70 लीटर पानी धुलाई में खर्च होता है।
इस तरह से हर वाहन की धुलाई में औसतन 60 लीटर पानी खर्च हो रहा है। इसके मुताबिक सभी धुलाई सेंटर में हर रोज लगभग ढाई लाख लीटर शुद्ध पेजयल बेकार में बहा दिया जा रहा है। यह आंकड़ा एक महीने में 75 लाख लीटर पहुंचता है। इनमें से कुछ सेंटर नगर पालिका के नलों की सप्लाई से चल रहे हैं।
यहां नलों में सीधे मोटर जोड़कर पेयजल से गाड़ी धुलाई का काम धड़ल्ले से किया जा रहा है। इस वजह से शादीपुर, कबाड़ी बाजार, बाकरगंज मोहल्ले में नगर पालिका की पानी सप्लाई देर से पहुंचती है। वहीं बड़े धुलाई सेंटर में सबमर्सिबल लगाकर सीधे भूगर्भ को खोखला किया जा रहा है।
इनसेट
हर दिन 1850 की बुझाई जा सकती है प्यास
एक मानक के अनुसार प्रति दिन प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी की जरूरत होती है। शहर में वाहन धुलाई के नाम पर हर दिन शुद्ध पेयजल ढाई लाख लीटर व्यर्थ में बहा दिया जा रहा है। इसे सहेजकर हर दिन 1850 से अधिक लोगों की पानी जरूरत को पूरा किया जा सकता है।
घर और बगीचे की सिंचाई में भी बर्बादी
शहर में घरों को धुलने और बगीचों को सींचने में भी शुद्ध पेयजल का उपयोग करते हैं। इसमें भी हर दिन लाखों लीटर पानी बर्बाद किया जा रहा है। इसे रोकने के लिए भी लोगों को स्वयं प्रयास करने होंगे।
लोगों ने जताई चिंता
फोटो-13- ज्वालागंज निवासी राहुल कहना है कि धुलाई सेंटरों में शुद्ध पेयजल से सफाई चिंता का विषय है। इसमें रोजाना लाखों लीटर पानी व्यर्थ बहा दिया जाता है। इस पर कोई रोक-टोक नहीं है। धुलाई करने के लिए सेकेंडरी वॉटर का ही प्रयोग करना चाहिए।
फोटो-14- राधानगर नई बस्ती निवासी पंकज बताते हैं कि गर्मी के बढ़ते ही शहर के ऊंचे ईलाकों में पानी की कमी हो जाती है। लगातार घट रहे भूगर्भ से आने वाले दिनों में पानी का संकट होने वाला है। फिर भी अनमोल पानी को बेमोल लोग बहा रहे हैं।
कोट्स
-शहर में चल रहे धुलाई सेंटरों को नोटिस दी जा चुकी है। इसके बावजूद भी कोई सेंटर धुलाई के नाम पर पानी की बर्बादी करता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। समीर कुमार कश्यप, ईओ, नगर पालिका