टीबी अस्पताल से रेफर किए गए एक रोगी ने सोमवार को तीन घंटे तक इलाज न मिलने पर तड़प कर दम तोड़ दिया। वह अपने इकलौते मासूम बेटे के साथ इलाज कराने आया था। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि पिता-पुत्र तीन घंटे तक चैनल गेट के पास बैठे रहे लेकिन इलाज नहीं मिला।
घाटमपुर कोतवाली क्षेत्र के दौलतियापुर गांव के जय नारायण का बेटा टिंकू (45) पांच साल से बहुआ के राजनगर में झोपड़ी डाल कर सात साल के बेटे राजा के साथ रहता था। गुजर बसर के लिए वह ठेला लगा कर दो वक्त की रोटी जुटाता था। ठेला लगाने वाले टिंकू को कई साल से क्षय रोग की शिकायत थी।
इलाज टीबी अस्पताल में चल रहा था। सोमवार को टिंकू की हालत ज्यादा खराब होने पर वह बेटे राजा के साथ इलाज कराने टीबी अस्पताल आया। यहां के चिकित्सक ने हालत गंभीर देख, उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया। दोपहर 12 बजे सदर अस्पताल पहुंचे टिंकू और उसके बेटे को कोई सही राह दिखाने वाला नहीं मिला।
किसे दिखाएं, कहां जाएं, इसी उधेड़बुन के बीच टिंकू चैनल गेट के पास ही करीब तीन घंटे तक तड़पता रहा। अंत में प्राण छूट गए। ज्यादातर लोग यह कहते सुने गए कि अगर समय से इलाज मिल जाता, तो शायद क्षयरोगी की जान बच सकती थी।
इलाज में लापरवाही की बात को सदर अस्पताल के सीएमएस डा. ओपी द्विवेदी ने नकार दिया। कहा कि संभवत: रोगी पर किसी अस्पताल कर्मी की निगाह नहीं पड़ी और न ही उसे डाक्टर के चैंबर तक ले जाया गया। यदि नजर पड़ी होती, तो इलाज जरूर होता। मौत तो ऊपर वाले के हाथ में है। उधर, कोतवाल आरके पांडेय ने बताया परिजनों को सूचना दे दी गई है। अगर वह किसी तरह की तहरीर देते हैं, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।