फोटो-14- थरियांव थाने में टाइल्स के साथ पकड़े चोरी के आरोपी
- सात लाख की चोरी में आरोपियों से एक लाख कीमत के टाइल्स बरामद
- पांच आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमा
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। शोरूम की बत्ती गुल कर लाखों के टाइल्स चोरी की घटना को अंजाम देने वाले दो कर्मियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। बाकी तीन फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस जुटी है।
सदर कोतवाली क्षेत्र के कृष्ण बिहारी नगर निवासी राममिलन शिवहरे का कजरिया टाइल्स का शोरूम हाईवे पर थरियांव थानांतर्गत कासिमपुर बीबीहाट में स्थित है। फर्म में देवेंद्र सिंह और उसका पिता विजय बहादुर सिंह निवासी कटोघन थाना खागा आठ साल से काम कर रहे हैं। देवेंद्र अपने लोडर से टाइल्स ढुलाई करता है। उसका पिता विजय बहादुर सिंह गेटमैन है। दोनों शोरूम के अंदर बने कमरे में परिवार संग रहते हैं।
फर्म में सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी सर्विसेज के माध्यम से तीन सुरक्षाकर्मी अनिरुद्ध तिवारी उर्फ धुन्नर तिवारी निवासी रमवां थाना राधानगर, सुखेन्द्र सिंह निवासी आबूनगर, शिवप्रताप दिवाकर निवासी रामगंज पक्का तालाब हनुमान मंदिर गोदाम की सुरक्षा ड्यूटी पर रहते हैं। वह 10 मई को बाहर चले गए थे। जहां से 22 मई को लौटे। गोदाम में माल का मिलान किया। काफी संख्या में टाइल्स की पेटियां कम मिलीं। कर्मचारियों से पूछताछ में कोई बात स्पष्ट नहीं हुई। शंका के आधार पर राममिलन की ओर से गुरुवार को थरियांव थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस को धरपकड़ में विजय बहादुर और सुखेंद्र हत्थे चढ़ गए। उन्होंने चोरी कबूल की। पुलिस ने बेचे गए स्थानों पर छापामारी की और 96 पेटी टाइल्स बरामद किया। बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस छापामारी कर रही है।
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खागा के कुछ व्यापारियों की भूमिका संदिग्ध
खागा। कजारिया शोरूम से चोरी हुए टाइल्स को ठिकाने लगाने में चर्चा है कि खागा कस्बे के कुछ टाइल्स कारोबारियों ने माल को खरीद रखा है। हालांकि व्यापारी कौन है, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। लेकिन जिस तरह से चोरी के तार खागा के व्यक्ति से जुड़ रहे हैं। उसके अनुसार कई व्यापारी पुलिस के शिकंजे में जांच में आए हैं। चोरों का खागा के कुछ टाइल्स कारोबारियों के यहां उठना-बैठना रहा है। (संवाद)
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हीटर लगाकर डिस्चार्ज कर रहे थे बैट्रियां
खागा। शोरूम में बिजली सप्लाई के सोलर पैनल का इस्तेमाल किया जाता है। पूरे शोरूम में सीसीटीवी लगा है। चोरों ने बताया कि रात में चोरी के समय सीसीटीवी और लाइट बैट्रियों को डिस्चार्ज कर बंद करते थे। इसके लिए हीटर का प्रयोग किया गया है। हीटर लगाते ही बैट्रियां का पॉवर खत्म हो गया और इस कारण कैमरे और लाइट बंद हो जाते थे। इसके बाद सुबह फिर कैमरे और बिजली सप्लाई चालू हो जाती थी। (संवाद)