फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फिर टिड्डी दल आने की बढ़ी संभावनाएं, प्रशासन अलर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
फतेहपुर। राजस्थान की ओर से टिड्डी दल के आने की एक बार फिर से संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसको लेकर प्रशासन अलर्ट हो गया है और किसानों को टिड्डी दल से फसलों को बचाने के लिए सुझाव दिए हैं।
विज्ञापन

जिला कृषि रक्षा अधिकारी सत्येंद्र सिंह ने कहा कि राजस्थान से टिड्डी दल के आने की संभावना है। टिड्डी दल को रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम कर लिए गए हैं।
टिड्डी एक प्रवासी कीट है, जो हजारों किमी तक उड़ सकता है।
यह पाकिस्तान होते हुए राजस्थान की तरफ आते हैं। इनके झुंड फसलों व वनस्पतियों को खाकर भारी नुकसान पहुंचाते हैं। जहां पर यह रात्रि विश्राम करते हैं, वहां की वनस्पति चट कर जाते हैं। एक टिड्डी अपने वजन के बराबर खाना खाती है। टिड्डी दल के संभावित आक्रमण और प्रवास की स्थिति में निम्न सुझाव जारी किए गए हैं।
विज्ञापन

यह दिए गए हैं सुझाव...
- टिड्डी दल के प्रकोप की सूचना ग्राम प्रधान, लेखपाल, कृषि विभाग के प्राविधिक सहायकों एवं ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से कृषि विभाग/जिला प्रशासन तक तत्काल पहुंचाएं।
- टिड्डी के प्रकोप की दशा में एक साथ इकट्ठा होकर टीन के डिब्बों, तालियां बजाते हुए शोर मचाएं।
- टिड्डी आक्रमण से फसल एवं वनस्पति को बचाने के लिए किसान भाई अपनी खड़ी फसल में नीम आयल को पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। इससे टिड्डी दल से फसल को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।
- टिड्डी दल आमतौर पर रात को फसलों, झाड़ियों व पेड़ों पर रुकते हैं। एक दल में करोड़ों की संख्या में टिड्डी होती हैं, जो पांच से 10 किलोमीटर के दायरे में फैली होती हैं।
- कृषि रक्षा रसायनों यथा क्लोरपाइरिफास 20 एवं 50 प्रतिशत ईसी, लैम्ड साइक्लॉथ्रिन पांच प्रतिशत ईसी, मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी, डेल्टामेथ्रीन 2.5 प्रतिशत ईसी, फिप्रोनिल 2.8 प्रतिशत ईसी का छिड़काव करके नियंत्रण किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें