प्रकृति की मार, प्रशासनिक बदइंतजामी और पानी के
अधिकाधिक दोहन से जिले के नौ ब्लाक डार्कजोन घोषित हो गए हैं। इन ब्लाकों
में जल स्तर ऊपर लाने के लिए प्रशासन ने नई बोरिंग, रिबोरिंग और नलकूपों के
लिए बिजली कनेक्शन पर रोक लगा दी है। इससे किसान परेशान हैं, उन्हें
सिंचाई का कोई साधन नहीं सूझ रहा है।
सदर तहसील के असोथर, खागा तहसील
के विजईपुर व बिंदकी तहसील के खजुहा और देवमई ब्लाक डार्कजोन में पहुंचने
से अछूते हैं। भूगर्भ जल विभाग की आई सर्वे रिपोर्ट में तेलियानी, भिटौरा,
हंसवा, ऐरांया, हथगाम, बहुआ, मलवां, धाता और अमौली ब्लाक को डार्कजोन घोषित
किया गया है।
इन ब्लाकों में सिंचाई व्यवस्था पर विपरीत असर दिखाई दे रहा
है। नहरों के टेल तक पानी न पहुंचने से ज्यादातर गांवों में किसान सिंचाई
के लिए निजी व्यवस्था पर निर्भर थे। तेलियानी विकास खंड के मवइया के
रामनरेश ने बताया कि निजी नलकूप की बोरिंग है, जिसमें इंजन लगा हुआ है।
बिजली का कनेक्शन लेने में डार्कजोन बाधा बना है।
किसान जगदीश प्रसाद ने
बताया कि गांव में जलस्तर तो ऊपर है, लेकिन प्रशासन ने बोरिंग पर रोक लगा
रखी है। सूखा से निपटने के लिए बोरिंग की जरूरत है, लेकिन लघु सिंचाई योजना
का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सहायक अभियंता, लघु सिंचाई डीएस तिवारी ने कहा कि डार्कजोन के ब्लाकों के बाबत प्रशासन ने हाल
ही में शासन को रिपोर्ट भेजी है। जिसमें दोबारा सर्वे कराने की मांग की गई
है। इसके अलावा प्रशासन ने इस समस्या से निपटने के लिए तालाब खुदवाने का
निर्णय लिया है। जिसके लिए सात करोड़ 23 लाख रुपये की डिमांड भेजी गई है।
क्या होता है डार्कजोन
जब भूगर्भ
जलस्तर तेजी से नीचे गिरता है, तो ऐसी अवस्था में संबंधित क्षेत्र को
डार्कजोन घोषित कर दिया जाता है। अमूमन इन ब्लाकों में सामान्य जलस्तर 100
से 110 फिट नीचे चला गया है।
डार्कजोन पाबंदी से जकड़ी कई योजनाएं
डार्कजोन
के चलते लघु सिंचाई की कई योजनाएं लटक गई हैं। इनमें मध्यम व गहरे बोर की
योजना, नलकूप योजना, रिबोरिंग व विद्युत विभाग की कनेक्शन देने की योजना
लटक गई है।