जिले में रविवार को दूसरे दिन गंगा के जलस्तर में कमी हुई, वहीं यमुना एक दिन घटने के बाद फिर उफान पर आ गईं। रविवार को जलस्तर मामूली रूप से बढ़ा। हालांकि इसकी जद में यमुना कटरी के ढाल वाले खेत आ गए हैं। गांव अभी दूर हैं, फिर भी जिला प्रशासन ने सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर रखा है। गांव में नदी किनारे की ओर रहने वालों को यह सलाह दी गई है कि अपना सामान निकाल लें, जिससे बाढ़ से उन्हें ज्यादा नुकसान न हो।
बता दें कि गंगा नदी का जलस्तर दो दिन से कम हो रहा है। रविवार को यह खतरे के निशान 100.3 से नीचे 98.460 पर रही। अब तक की बाढ़ से गंगा तटवर्ती क्षेत्र में किसी प्रकार का नुकसान नहीं है, लेकिन फिरोजपुर, चक टिहानी, सेनपुरकारी, शमापुर, मकदूमपुर, कोतला, वासलाबाद, हाजीपुर गंग, भिटौरा, कोटिया गांव के लोग बाढ़ को लेकर सशंकित हैं।
इन्हें तीन साल पहले आई बाढ़ के भयावहता का डर सता रहा है। वहीं, यमुना का पानी रविवार को मापक निशान 93.75 पर रहा। यमुना का खतरे का निशान 103 सेमी तय है। इससे तटवर्ती गांव मडैयन, बरियारपुर, धाना, टिकुरा, मड़ौली, गुरवल, असाट, नरौली, भउनापुर, चिटहा, सरकंडी, लक्ष्मणपुर, रामनगर कौहन, रमसोलेपुर, जरौली, कोटवा, सरवल, ललौली, दतौली और घाटमपुर समेत कई गांवों की फसलें बर्बाद हो गई हैं।
वहीं, किशनपुर से गढ़ीवा मार्ग के नाला मेें यमुना नदी का पानी भर गया है। इससे गढ़ीवा, मझगवां समेत कई गांव के लोगों को अधिक दूर घूमकर किशनपुर आना पड़ रहा है। एडीएम आलोक सिंह ने बताया कि बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। हल्का लेखपाल, कानूनगो व अन्य राजस्व कर्मचारियों को क्षेत्र के तटवर्ती गांव की प्रतिदिन रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।
शहर में दिन भर हुई रिमझिम बारिश
फतेहपुर। मौसम की आंख मिचौनी दिन भर रही। रुक-रुक कर दिन भर की रिमझिम बारिश से मौसम ठंडा बना रहा। पूरे दिन आसमान पर बादलों ने डेरा जमाए रखा। महिलाएं रिमझिम बारिश से बच्चों को छाता से बचाव करती दिखाई दीं। मौसम के उतार-चढ़ाव लोगों में जुकाम, खांसी बीमारियां फैलने लगी हैं। नर्सिंग होम और सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है।