मृतक महेंद्र मौर्य की फाइल फोटो।
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बाबा तारा नहर में रविवार की रात ट्रैक्टर पलटने से किसान की मौत हो गई। वह धान लादने पड़ोस के गांव गया था। किसान ने सुबह धान लादने को कहा तो वह खाली ट्रैक्टर लेकर लौट रहा था। इसी दौरान हादसा हो गया। हादसे की जानकारी ग्रामीणों को सुबह हुई।
असोथर के मुराइनडेरा गांव के ज्ञान सिंह मौर्य पुलिस से सेवानिवृत्त हैं। चार बेटों में बड़ा शिव कुमार व सबसे छोटा अवधेश पुलिस विभाग में हैं। दूसरे नंबर का महेंद्र मौर्य (40) छोटे भाई ननबुद्दा के साथ गांव में रहता था। महेंद्र अपना ट्रैक्टर भी चलाता था। ननबुद्दा अनाज कारोबारी है। रविवार को महेंद्र को गांव से दो किलोमीटर दूर फटी बरगदी गांव के किसान राजकरन का धान लादना था। महेंद्र वहां रात में पहुंचा।
देरी की वजह से राजकरन ने सुबह भाड़ा लोड कराने की बात कही। यह भी कहा कि यहीं रुक जाओ, पर महेंद्र रात 11 बजे ही ट्रैक्टर लेकर नहरी पटरी से लौटने लगा। बाबातारा गांव के पास ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर नहर में पलट गया। ट्रैक्टर के नीचे दबा महेंद्र पूरी रात वही पड़ा रहा। सुबह परिवार के लोगों को जानकारी हुई तो मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मदद से ट्रैक्टर के नीचे से महेंद्र को निकालकर सदर अस्पताल लाया गया। डॉक्टराें ने मृत घोषित कर दिया। एसओ राजेश कुमार मौर्य का कहना है कि युवक की ट्रैक्टर से दबकर मौत हुई है।
बच्चों के सिर से छिन गया पिता का साया
महेंद्र का सपना बेटे चंद्र प्रकाश (13) और बेटी रिया (10) को पढ़ा लिखाकर काबिल बनाना था। वह भी चाहता था कि बाबा और चाचा की तरह चंद्रप्रकाश भी खाकी वर्दी पहने पर, ऐसा नहीं हो सका। सोमवार को जैसे ही महेंद्र के परिवार को हादसे की खबर लगी, पूरा परिवार सदमे में डूब गया। पत्नी सुनीता अवाक रह गई। बेटा और बेटी के सिर पिता का साया छिन गया।