फोटो-04-माता काली के रौद्र रूप की झांकी। संवाद
धाता। परसिद्धपुर में तीन दिवसीय रामलीला उत्सव का समापन रविवार देर रात भव्य झांकियों के साथ हुआ। मां काली के रौद्र रूप और सिर पर मटकी रखकर चलने वाली झांकियों ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। भांगड़ा नृत्य ने समा बांध दिया।
यह परंपरा 1962 में शुरू हुई थी, जो 1965 से बड़े स्वरूप में निरंतर चली आ रही है। रात नौ से दो बजे तक निकाली गईं झांकियों में शंकर भगवान, सीता-राम, राधा-कृष्ण, ब्रह्मा-विष्णु-महेश, कठपुतली नृत्य, कामधेनु गाय, बकासुर और सीताहरण जैसे प्रसंग शामिल रहे।
स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित झांकी में रामप्रसाद बिस्मिल, राजगुरु और अशफाक उल्लाह खां को फांसी देते दृश्य को देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे।
इस मौके पर गांव चौकी कमेटी से राम मूरत सिंह, मान सिंह लाला, राजेंद्र सिंह लाला, श्रवण कुमार सिंह, पुरवा चौकी कमेटी से विक्रम सिंह विक्की, रामलोचन विश्वकर्मा, सुमिरन काका और भोला मौर्य की अहम भूमिका रही।