फतेहपुर। जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीज आएं तो पानी की बोतल साथ लेकर आएं। क्योंकि यहां पीने के पानी के लिए रखे मटकों के अंदर पानी की एक बूंद नहीं है। शनिवार को मरीज मटके में पानी पीने पहुंचे, लेकिन उन्हें बिना प्यास बुझाए लौटना पड़ा।
जिला महिला और पुरुष अस्पताल के बाहर पानी के आरओ प्लांट अरसे से बंद पड़े हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल और आयुष विंग की ओपीडी में आने वाले मरीजों के पीने के पानी के इंतजामों की औपचारिकता निभाई है। दोनों जगह मरीजों के पीने के पानी के लोहे के स्टैंड में मिट्टी के मटके रखवाए गए हैं।
त्येक मटके में एक-एक स्टील के मग रखे हैं। शुरुआत में दो चार दिन मटकों में पानी भरा गया, लेकिन अब किसी भी मटके में पानी नहीं भरा जाता। ऐसे में मटके सूखे हैं। मरीज प्यास बुझाने के लिए मटका खोलकर देखते हैं, लेकिन पानी न होने के कारण निराश होकर लौट जाते हैं।
संघौली निवासी नरेश कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल की ओपीडी में पीने के पानी का भीषण संकट है। अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर के पास पहुंचने में समय लगता है। ऐसे में भीषण गर्मी में प्यास लगती है। शनिवार को ओपीडी में पेट दर्द होने के कारण दिखाने आए थे। प्यास लगने पर मटके के पास गए तो मटका खाली था। ऐसे में काफी देर तक अस्पताल में प्यासे बैठना पड़ा।
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रमवा निवासी राजेश ने बताया कि जिला अस्पताल की आयुष विंग में भी पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। पूरे परिसर में चालू हालत में कोई हैंडपंप नहीं है, जिससे प्यास बुझाई जा सके। ओपीडी में डॉक्टर के पास पहुंचने में समय लगता है। लाइन से निकलकर पानी खोजने पर लाइन में सबसे पीछे जाना पड़ता है। पास रखा मटका केवल देखने के लिए है।
प्रतिदिन सुबह अस्पताल खुलने के पहले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मटकों में पानी भरने के निर्देश हैं। अगर पानी नहीं भरा जाता है तो यह गंभीर अपराध है। अगले कार्यदिवस को यह व्यवस्था देखी जाएगी। मटकों में पानी न मिलने पर दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई होगी। -डॉ. आरपी सिंह, प्राचार्य, मेडिकल काॅलेज
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