फोटो-29-विजय प्रताप सिंह। संवाद
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फतेहपुर। धार्मिक स्थल विवाद (मंदिर-मकबरा) प्रकरण में वर्ष 2012 के पहले तक 753 गाटा संख्या में ठाकुरजी विराजमान मंदिर दर्ज है। पुराने अभिलेखों में मकबरे का कोई उल्लेख नहीं है। यह दावा सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचे खुद को उक्त जमीन का मालिक बताने वाले कानपुर नवीन नगर निवासी विजय प्रताप सिंह ने किया है।
उन्होंने डीएम रविंद्र सिंह से मिलकर उन्हें जमीन संबंधी कुछ कागज भी सौंपे हैं। इससे पूर्व विजय ने अधिवक्ता रामजी सहाय से इसी मुकदमे की पैरवी से संबंधित जानकारी ली। विजय का आरोप है कि उनके पिता के तत्कालीन अधिवक्ता को मिलाकर मकबरा पक्ष ने एक पक्षीय फैसला कराया है। 30 अगस्त को सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में मामले की सुनवाई है।
बताया कि 2012 के पहले के अभिलेखों में भूमि गाटा संख्या 753 असोथर निवासी रामनरेश सिंह, जो कि उनके पिता हैं के नाम पर दर्ज है। अब पिता की मृत्यु हो चुकी है। विजय प्रताप खुद ही मामले की पैरवी कर रहे हैं।
उनकी ओर से डीएम को दिए गए पत्र में कहा गया है कि स्व. पिता रामनरेश सिंह ने भूमि गाटा संख्या 753 करीब 10 बीघा 18 बिस्वा शकुंतला मानसिंह पत्नी नरेश्वर मानसिंह से 30 दिसंबर 1970 में बैनामा कराया था। इसके बाद पिता का नाम दर्ज हो गया।
आरोप है कि कथित मुतवल्ली मो. अनीस ने सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में 2007 में वाद दायर किया था। इस दौरान उनके पिता वृद्ध हो चुके थे। ऐसे में वह पैरवी करने नहीं आ पाते थे। ऐसी स्थिति में उनके अधिवक्ता को मिलाकर कथित मुतवल्ली ने उनकी जमीन मकबरे के नाम दर्ज करा ली थी।
जानकारी होने के बाद 2015 में वाद दायर किया गया। इसके बाद 2023 में सिविल जज ने अपना पुराना फैसला रद्द कर दिया था। इसकी जानकारी होने पर कथित मुतवल्ली ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में वाद दाखिल कर रखा है। उधर, सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में 30 अगस्त को सुनवाई लगी है।