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Fatehpur News: कातिल बेटे के कांपे हाथ, बच गया पिता

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संवाद न्यूज एजेंसी
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धाता/फतेहपुर। मां के बाद पिता की हत्या में बेटे के हाथ कांप गए, शायद यही वजह रही कि रोशन सिंह जिंदा है। कातिल बेटा योजना के तहत पिता को मारने के इरादे से उनकी चारपाई तक पहुंचा था। उस समय रोशन गहरी नींद में सो रहे थे। उसके पास पूरा मौका था।
धाता थाने के अढौली गांव के हिमांशू को जुआरी बताया जाता है। वह ऑनलाइन सट्टा, जुआ खेलता था। उसने कई लोगों से बैंक लोन के नाम पर कर्ज भी ले रखा था। कर्ज के चक्कर में तीन दिन पहले मां प्रभा के कमरे से 15 लाख कीमत के सोने के जेवरात व एक किलो चांदी भी चोरी किए थे।
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जेवरात चोरी का पता लगने पर सोमवार को पिता ने फटकारा था और जेवरात लाने की बात कही थी। इस दौरान किसी से मोबाइल पर हिमांशू ने पिता की बात कराई थी। मोबाइल पर बात करने वाले शख्स ने बोला था कि जेवरात लौटा देगा। जेवर के चक्कर से हिमांशू तनाव में था। मां भी जेवरात के लिए दबाव बना रही थी। उसने मां की हत्या के बाद शव को भूसे की प्लास्टिक बोरे में भरा था।
उसे मालूम था कि करीब एक बजे के आसपास पिता राजापुर से लौट आएगें। इसी वजह से मंगलवार सुबह ही हत्या कर दी। उसने आनन-फानन ट्रैक्टर ट्राॅली में शव का बोरा रखा और नदी के किनारे छिपाकर भाग आया था। मां की हत्या का पिता से राज खुलने का डर था। वह नदी में शव फेंकना चाहता था। दो साथियों संग करीब शाम पांच बजे वह बाइक से पहुंचा था।
नदी के किनारे शवदाह का निर्माण हो रहा है। निर्माण सामग्री की सुरक्षा के लिए वहां चौकीदार झोपड़ी बनाकर रहता है। चौकीदार ने तीनों को टोंका था और दोबारा न आने को भी बोला था। इसी वजह से आरोपी बारिश में खेत पर पानी लगाने के बहाने फिर घर से निकला था। करीब रात 11 बजे वह बाइक से साथियों के साथ शव को ठिकाने लगाने टीले पर गया था। चौकीदार ने पुलिस को बताया कि रात को बाइक सवार उसे झोपड़ी में देखकर भाग निकले थे। पुलिस हिमांशू के साथ रहने वाले दोस्तों की भी तलाश में जुटी है।


चरवाहे ने दोपहर को देखा शव, पुलिस को नहीं दी खबर
ट्रैक्टर ट्राॅली से शव का बोरा उतारकर टीले पर रखने के बाद हिमांशू लौट रहा था। टीले से कुछ दूरी पर चरवाहे बकरी चरा रहे थे। एक चरवाहे ने हिमांशू से बोरे के बारे में भी पूछा था। कबाड़ का बोरा बताकर वह चला गया था। चरवाहा कुछ समय बीतने के बाद बोरे के पास पहुंचा। उसने बोरे के बंधन की ओर टटोला। किसी का शव होने का उसे अहसास हुआ। इसके बाद उसने शव महिला या फिर पुरुष का है, यह जानने के लिए पैरों को छूकर भी देखा था। पैर में बिछिया, पायल होने से महिला का शव जानकर वह अपने गांव ऐरई लौट गया। पूरे गांव में चर्चा फैलने के बाद भी पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।

पिता के 55 लाख का बीमा, मां के नहीं मिले कागज
आरोपी हिमांशू की करीब 23 से 24 साल के आसपास की उम्र है। उसके दिमाग में साजिश दो माह से चल रही थी। योजना के तहत पिता व मां को बीमा के लिए प्रेरित किया था। उसने पिता की एक पॉलिसी दिसंबर माह में 30 लाख व दूसरी फरवरी माह में 25 लाख की ली थी। उसने मां की बीमा पॉलिसी कराई थी। मां की पॉलिसी के कागज हिमांशू ने अपने पास ही रखे थे। पॉलिसी में नामिनी हिमांशू ही था।
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मृतका के बड़े बेटे को जेठ ने ले रखा गोद
मृतका के दो पुत्र अंकुर और हिमांशू हैं। छोटा हिमांशू मां व पिता के साथ रहता था। बड़े को मृतका के सेवानिवृत्त फौजी जेठ लाल सिंह ने गोद ले रखा था। जेठ लाल सिंह प्रयागराज में रहते हैं। उन्हें कोई पुत्र व पुत्री नहीं है। हिमांशू के चुराए जेवरातों में अंकुर भी हिस्सेदार था।
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