अब शिक्षकों को स्कूल न आने वाले बच्चे के घर में प्रतिदिन दस्तक देनी होगी। रोड मैप के आधार पर शिक्षक कक्षा शुरू होने के पहले बच्चे को घर से लाएंगे। इतना ही नहीं इसकी मॉनीटरिंग की भी व्यवस्था की गई है। कोई भी अधिकारी बिना शिक्षक की जानकारी के किसी भी बच्चे के घर सीधे पहुंचेंगे। बच्चे के स्कूल न आने और अन्य बातों पर रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजेंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी स्कूल के शिक्षकों को पंजीकृत बच्चे के घर का रोड मैप तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं। रोड मैप हर हालत में 15 अप्रैल तक ब्लाक संसाधन केंद्र में दाखिल करना है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने फर्जी छात्र संख्या पर अंकुश लगाने के साथ स्कूलों का शैक्षिक स्तर सुधारने के लिए यह कदम उठाया है। स्कूल में पंजीकृत प्रत्येक बच्चे के घर का रोडमैप स्कूल के साथ विभागीय अधिकारियों के रिकार्ड में होगा। बच्चे के घर के दरवाजे पर उसका नाम और कक्षा का विवरण अंकित होगा। रोड मैप का विभाजन शिक्षकों की संख्या के आधार पर होगा। सुबह क्लास में उपस्थिति दर्ज करने के बाद शिक्षक आवंटित रोड मैप वाले वाले क्षेत्र के बच्चे के घर जाएंगे और बच्चा स्कूल क्यों नहीं आया इसका पता करेंगे। अगर अकारण बच्चा स्कूल नहीं आया है, तो उसे स्कूल लाएंगे।
स्कूल में रोड मैप देखकर गांव के घरों और स्कूल में पंजीकृत छात्रों की संख्या सहज ही कोई भी समझ सकेगा।
शासन से जारी इस निर्देश का पालन बेसिक शिक्षा विभाग ने शुरू कर दिया है। भिटौरा विकास खंड में रोड मैप तैयार करने के निर्देश जारी हो चुके हैं। कुछ शिक्षकों ने तो इसे तैयार भी कर लिया है। बीएसए विनय कुमार ने बताया कि सभी परिषदीय स्कूलों में एमडीएम और बाल अधिकारों की तरह रोड मैप भी अंकित होगा। अगर शिक्षक ने बच्चे को स्कूल ले जाने का कोई प्रयास नहीं किया है, तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।