औरेया जिले के शेरगढ़ घाट में डूबने वाले उमाकांत और उसके भांजे रतन द्विवेदी के शवों के आते ही क्षेत्र में कोहराम मच गया। परिजन शवों से लिपटकर रोते बिलखते रहे। घर की महिलाएं तो आपा खो बैठीं। वे रो-रो कर बेहोश हो गईं। सैकड़ों लोग अंतिम शव यात्रा में शामिल हुए।
भिटौरा घाट पर दोनों को एक साथ मुखाग्नि देकर दुनिया से विदा किया गया।
दोनों के शव सोमवार की शाम घर पहुंचे। खंभापुर मोहल्ला निवासी उमाकांत अवस्थी अपनी युवा अवस्था में ही समाजसेवा के कार्य करते थे। सुबह से ही अखबारों में खबर पढ़ने के बाद लोग व्हाट्सएप पर दुख प्रगट करते रहे।
बेटे का शव देखकर मां सुनीता दहाड़ मारकर रोने बिलखने लगे। उसे बड़े बेटे की मौत का सदमा लगा था। बहनों पूनम, जूली, अलका और निधि व छोटे भाई अजय का रो रो कर हाल बेहाल था। उमाकांत के व्यवहार और समाज सेवा के संघर्ष की चर्चा होती रही।
उधर, रेलवे बाजार इलाके में रतन द्विवेदी का शव आते ही मां मंजू देवी का हाल बेहाल हो गया। रतन के गुजरात में नौकरी करने वाला बड़ा भाई केतन औरेया पहुंचा। वहीं से भाई के शव को लेकर घर आए। यहां पर बहन दिव्या उर्फ रानी हाल बेहाल हो गई। वह भाई की मौत के गम में बार-बार सिर पटकती रही।
इस मौके पर शहर प्रमुख लोगों में बसपा नेता समीर त्रिवेदी, क्रांग्रेस नेता राजेंद्र लोधी, स्वरूप राज सिंह जूली, महेंद्र सिंह, अमित मिश्र नीटू, अनुराग मिश्र उर्फ पुत्तन, व्यापारियों में प्रदीप गर्ग, पूर्व सभासद दिनेश खलीफा, भाजपा नेता सुशील तिवारी, सपा नेता संतोष द्विवेदी, जिला पंचायत सदस्य बबलू कालिया समेत सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा रही।