जाफरगंज (फतेहपुर)। शराब का शौक पूरा करने के लिए जमीन बेचने की जिद कर रहे पूर्व प्रधान पिता को उसके बड़े बेटे धर्मेंद्र ने पीटकर मार डाला। कमरे में गले में फंदा डालकर घसीटा, सीढ़ियों से सिर तब तक टकराया, जब तक मौत नहीं हो गई। इसके बाद पड़ोस में रहने वाले चचेरे भाई को हत्या की सूचना देकर दरवाजा बंद कर भाग निकला। पुलिस ने ताला तुड़वाकर शव को बाहर निकाला। छोटे बेटे की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस हत्यारोपी की तलाश कर रही है।
जाफरगंज थाना क्षेत्र के इटरा गांव निवासी किसान होरीलाल यादव (70) वर्ष 1990 से 2000 तक ग्राम प्रधान थे। उनके दो बेटे धर्मेंद्र और वीरेंद्र हैं। पत्नी सावित्री की छह माह पहले बीमारी से मौत हो गई थी। छोटा बेटा वीरेंद्र दो दिन पहले एक रिश्तेदार के घर निमंत्रण में गया था। पूर्व प्रधान के भतीजे राजू ने बताया कि दादा शराब के शौकीन थे। वह शाम को घर नशे में पहुंचे थे। जमीन बेचने की बात करने लगे। चचेरे भाई धर्मेंद्र से विवाद होने लगा। उनके बीच अक्सर विवाद होता था। इसी वजह से कोई मौके पर नहीं गया। दादा की चीख पुकार बाहर तक सुनाई देती रही। अचानक चीख पुकार बंद हो गई। तभी धर्मेंद्र बाहर निकला, उसने कोठरी के दरवाजे पर ताला बंद किया। दादा की हत्या कर देने की बात कही। उसे बुलाकर चाबी दी और भाग निकला। घटना की सूचना पर एएसपी राजेश कुमार, सीओ अभिषेक तिवारी, कार्यवाहक एसओ रामनरेश यादव मौके पर पहुंचे। पुलिस ताला तोड़कर अंदर घुसी। पूर्व प्रधान का आंगन के पास सीढ़ियों पर शव पड़ा था। उसके गले में अंगोछा कसा था। घर में घसीटने के निशान थे। राजू ने बताया कि दादा ने दो बीघा जमीन का सौदा तय किया था। खेत बेचने का धर्मेंद्र विरोध कर रहा था। एएसपी राजेश कुमार ने बताया कि घटनास्थल देखकर साफ हुआ कि मारपीट के दौरान पिता की गला दबाकर धर्मेंद्र ने हत्या करने की कोशिश की। सफल न होने पर घसीटते हुए सीढ़ियों तक ले गया। सीढ़ियों पर सिर पटक कर चोट पहुंचाई, जिससे बुजुर्ग की मौत हो गई। आरोपी की तलाश की जा रही है।
पिता की करतूतों से ऊब गए थे बेटे
- 25 बीघा से 15 बीघा बची थी जमीन
-आरोपी बेटे की पत्नी छोड़कर चली गई थी
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। इटरा गांव के पूर्व प्रधान की हरकतों से परिवार के लोग परेशान हो गए थे। परिवार के मुताबिक संपत्ति बेचकर पूर्व प्रधान रुपयों को नशे में खर्च कर रहा था। बची संपत्ति को अब बेचने की कोशिश में जुटा था। ग्रामीणों ने बताया कि होरीलाल दस साल तक प्रधान रहे हैं। वह परिवार के लिए कुछ नहीं कर पाए थे। उनके पास पैतृक संपत्ति में करीब 25 बीघा खेत थे। प्रधानी खत्म होने के बाद खेत बेचकर जिंदगी का गुजर बसर करने लगे थे। रकम से शराब की लत को पूरा करते थे। पांच साल पहले धर्मेंद्र की शादी हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद ही धर्मेंद्र को पत्नी छोड़कर चली गई थी। धर्मेंद्र को लगता था कि पिता की हरकतों की वजह से ही पत्नी छोड़कर गई है। जिससे तनाव में धर्मेंद्र रहता था। धर्मेंद्र का छोटा भाई वीरेंद्र गांव में रहता है। वह कृषि कार्य से परिवार का खर्च चलाता था। कुछ दिनों पहले एक कोटेदार से दो बीघा खेत का सौदा पूर्व प्रधान ने किया था। दोनों बेटे खेत बेचने का विरोध कर रहे थे।
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