नरसिंहपुर-कबरहा मेें दस्यु शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ
के बनवाए शिवहरे रामजानकी मंदिर में उसी की मूर्ति स्थापना पर उथल-पुथल
मची है। क्षेत्र के कुछ लोग इसे आस्था से जोड़ रहे हैं। राजनैतिक दलों में
इस मामले में विरोधाभास है। कोई इसे राजनीति से न जोड़ने की बात कह रहा है
तो कोई इसे खालिस सियासत करार दे रहा है।
धाता ब्लाक क्षेत्र के
नरसिंहपुर-कबरहा गांव में चार फरवरी से 14 फरवरी तक यह आयोजन चला। इसकी
राजनीति के जानकर इसे शुरुआत से ही सियासत से जोड़कर देख रहे थे। मिर्जापुर
से पूर्व सांसद व दस्यु ददुआ के भाई बाल कुमार पटेल ने इस आयोजन की
पृष्ठभूमि तैयार कर मूर्तियां स्थापित कराईं।
इस काम में उन्हें सजातियों
का साथ मिला। मूर्ति स्थापना के लिए जनता से बाकायदा हामी भी भराई गई। इससे
राजनैतिक गलियारों मेें यह बात साफ हो गई थी कि वह अब अपना संसदीय क्षेत्र
बदलना चाहते हैं।
बालकुमार खुद अपने लिए राजनीति पृष्ठभूमि तैयार कर रहे
हैं और अपने परिवार से एक करीबी शख्स को राजनीति की सीढ़ी चढ़ाना चाहते
हैं। अमर उजाला ने धार्मिक महोत्सव समाप्त होने के बाद राजनैतिक दलों से
बात की तो ज्यादातर वोटों की राजनीति को लेकर खामोश रहे।
सपा के पूर्व
सांसद राकेश सचान बोले कि धार्मिक कार्यक्रम को राजनीति से जोड़ने की बात
गलत है। ददुआ का मंदिर अधूरा था। परिवार ने तो उसे पूरा कराने का काम किया
है। बाल कुमार मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र की राजनीति करते हैं।
ऐसे में
उन्हें फतेहपुर से चुनाव लड़ने की आवश्यकता नहीं है। भाजपा के पूर्व मंत्री
राधेश्याम गुप्ता ने कहा कि अरे बाबा हमें इस मामले में न डालो। यह उनका
अपना मामला है।
खागा कांग्रेस के नगर अध्यक्ष कलीम उल्ला ने कहा कि मंदिर
में ददुआ की मूर्ति स्थापना से लेकर पूरा कार्यक्रम सियासी है। मंदिर में
दस्यु की मूर्ति किसी भी सूरत में नहीं लगनी चाहिए थी।
पूरे इलाके में
चर्चा है कि बाल कुमार क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसी कारण धर्म की
आड़ ली गई है। बसपा जिलाध्यक्ष सुनील कुमार गौतम ने कहा कि हमारे यहां
बयान आलाकमान की ओर से होता है। हम इस बारे में कुछ नहीं कह सकते।