स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर तैनात कर्मचारियों ने
अपनी मांगों को मनवाने के लिए सड़क पर उतरने के बजाय दूसरा तरीका निकाला।
तरीका ऐसा कि काम भी प्रभावित न हो और समस्याएं भी खत्म हो जाएं। शुक्रवार
को सरकार की वादाखिलाफी का विरोध गांधीगिरी से कर रहे संविदा चिकित्सकों ने
एक घंटा ज्यादा काम कर शांति मार्च निकाला। मांगों को जायज करार देते हुए
अब 29 फरवरी से दो घंटे ज्यादा काम करने का ऐलान किया है। फिर भी बात नहीं
बनने पर छह मार्च से काला फीता के साथ काम और 13 मार्च से आमरण अनशन व भूख
हड़ताल करने की धमकी दी।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी
संघ के बैनर तले नौ सूत्रीय मांगों के मुद्दे पर संविदा चिकित्सकों ने 21
फरवरी से 28 फरवरी के मध्य एक घंटा ज्यादा काम करने का बीड़ा उठा रखा है।
इसी कड़ी में संविदा चिकित्सकों ने शुक्रवार को विरोध का नायाब तरीका
आजमाने के साथ शांति मार्च के साथ सीएमओ दफ्तर का रुख किया।
संघ अध्यक्ष
डॉ. कुमार आनंद व वरिष्ठ उपाध्यक्ष केके पांडेय की अगुवाई में डेढ़ सौ
संविदा चिकित्सक शांतपूर्वक हक की आवाज बुलंद करने पहुंचे। वरिष्ठ
उपाध्यक्ष ने कहा कि सरकार वाजिब मांगाें पर गौर नहीं कर रही है।
ऐसे में
कितने समय चुप बैठा जा सकता है। मुख्यमंत्री के नाम प्रेषित नौ सूत्रीय
ज्ञापन एसीएमओ डॉ. एलआर सचान को सौंपा गया। जिसमें उल्लेखित मांगें पूरी न
किए जाने पर 29 मार्च से पांच मार्च तक कार्य की सीमा एक घंटे के बजाय दो
घंटे ज्यादा करने की बात कही गई है।
इसके अलावा छह मार्च से काला फीता बांध
कर काम करने और फिर 13 मार्च से बड़े आंदोलन की चेतावनी शामिल है। इस मौके
पर डॉ. सुरेश राजवंशी, डॉ. शाबान, डॉ. नदीम, डॉ. रंजीत कुमार, डॉ. मसूद
मुख्य रूप से मौजूद रहे।