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Fatehpur News: छह मौतें...कई सवाल, 48 घंटे बाद भी जिम्मेदार बिना जवाब

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फोटो 31 एचएएमपी 42- कंपनी मालिक विजय प्रताप सिंह। स्रोत - इंटरनेट
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हमीरपुर। बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे को 48 घंटे बीत चुके हैं लेकिन छह लोगों की मौत के बाद भी जिम्मेदारों के पास कोई जवाब नहीं है। प्रशासनिक कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद मृतकों के परिजन, ग्रामीण और प्रत्यक्षदर्शी अब केवल मुआवजे नहीं बल्कि जवाबदेही तय किए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संरचना का अचानक ढह जाना महज आंधी का परिणाम नहीं हो सकता। निर्माण गुणवत्ता, सुरक्षा इंतजाम और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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कंडौर-परासनी मार्ग पर बेतवा नदी में बन रहे पुल का एक हिस्सा बृहस्पतिवार रात करीब 12:20 बजे भरभराकर गिर गया। हादसे के समय पुल पर केबल खींचने का काम चल रहा था। हादसे में चार मजदूरों और दो सुरक्षा कर्मियों की मौत हो गई। तीन मजदूरों को घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
घटनास्थल पर पसरा सन्नाटा और बिखरा मलबा कई सवाल खड़े कर रहा है। टूटे पिलर, उखड़े कंक्रीट ढांचे और बाहर निकली सरिया को देखकर ग्रामीण निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुल निर्माण मानकों के अनुरूप हो रहा था तो आंधी के दबाव में पिलर नंबर पांच और उससे जुड़ी स्लैब की पूरी संरचना कैसे ध्वस्त हो गई। इन सवालों के जवाब का इंतजार हर किसी को है। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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पुलिस ने कार्यदायी संस्था, उसके मालिक और सुपरवाइजर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अब पूरे मामले में पुलिस विवेचना और तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट पर निगाहें टिकी हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी हादसे के कारणों को लेकर मंथन जारी है।

बच्चा बोले, निर्माण गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच हो

मोराकांदर परासनी गांव निवासी बच्चा निषाद ने कहा कि जिस रात हादसा हुआ उस रात सामान्य आंधी नहीं बल्कि तेज तूफान आया था। उनके घर की एक दीवार में भी दरार पड़ गई है। आरोप है कि पुल निर्माण में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। गांव के लोग रोजाना निर्माण कार्य देखते थे। यदि काम निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ होता तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता। निर्माण की गुणवत्ता ठीक होती तो पुल का ढांचा इस तरह नहीं टूटता। निष्पक्ष जांच से पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।

इनकी चली गई जिंदगी, परिवार हो गए बेसहारा
हादसे में गंगाचरण यादव, सभाजीत उर्फ लाला, लोकेंद्र निषाद, कुलदीप निषाद, पुष्पेंद्र सिंह चौहान और राजेश पाल की मौत हुई थी। हादसे के बाद सभी परिवार बेसहारा हो गए। परिजन का कहना है कि आर्थिक सहायता जरूरी है लेकिन उससे भी अधिक जरूरी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और न्याय सुनिश्चित करना है।

आरोपी-1 : मैसर्स डी सेल्टर कानपुर
पुल निर्माण कार्य करा रही कंपनी के खिलाफ हादसे के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है।

आरोपी-2 : विजय प्रताप सिंह
कार्यदायी संस्था के मालिक।

आरोपी-3 : नितीश सचान
निर्माण कार्य से जुड़े सुपरवाइजर।
तीनों के खिलाफ कुरारा थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (1) और 125 (ए) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस प्राथमिकी के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
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हादसे के बाद उठ रहे बड़े सवाल
- हादसे के समय जिम्मेदार अफसर मौके पर मौजूद थे या नहीं?
- निर्माणाधीन ढांचा आखिर अचानक कैसे ढह गया?
- छह लोगों की मौत की जवाबदेही कौन तय करेगा?

फोटो 31 एचएएमपी 42- कंपनी मालिक विजय प्रताप सिंह। स्रोत - इंटरनेट

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