फतेहपुर। 16 साल पुराने गैरइरादतन हत्या व एससी-एसटी के मामले में कोर्ट ने दो पक्षों के सात लोगों को दोषी करार दिया। एससी-एसटी कोर्ट के न्यायाधीश डॉ. मो. इलियास ने गैरइरादतन हत्या में चार दोषियों को आठ वर्ष की कैद सजा सुनाई है।
साथ ही प्रत्येक पर 19-19 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। वहीं दूसरे पक्ष के तीन आरोपियों को एससी-एसटी, मारपीट के मामले में तीन-तीन साल की कैद व 9-9 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
हथगाम थाना क्षेत्र के इशाकपुर गांव में 14 अगस्त 2010 को रंजिश को लेकर बुद्धा और जय सिंह के दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था। बुद्धा पक्ष से रग्घू, प्रेमचंद्र, रामभवन और विनोद बीच-बचाव कराने पहुंचे। गांव के सुखराम, राकेश, ओम प्रकाश लोधी और जय सिंह ने गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडे से चारों को पीटा था। इसमें रग्घू के सिर में चोट लग गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
पुलिस ने चारों अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमे में चार्जशीट दाखिल की थी। बुधवार को कोर्ट में मामले की अंतिम सुनवाई हुई। सात गवाह पेश किए गए। कोर्ट ने सुखराम समेत चारों को सजा सुनाई। दूसरे पक्ष के जय सिंह की ओर से रामकेश ने बुद्धा, कमलेश, प्रेमचंद्र गुप्ता समेत चार के खिलाफ एससी-एसटी, गाली-गलौज और मारपीट की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
कोर्ट ने बुद्धा, कमलेश और प्रेमचंद्र गुप्ता को तीन वर्ष का कारावास और प्रत्येक को नौ हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। बुद्धा पक्ष के एक अभियुक्त की स्वाभाविक मौत हो चुकी है।
गोकशी और आबकारी में दो दोषी
फतेहपुर। गोकशी और आबकारी के अलग-अलग मामलों में कोर्ट ने बुधवार को दो आरोपियों को दोषी करार दिया। बिंदकी कोतवाली पुलिस ने 2013 में जालौन जिला डकोर निवासी शमीम को गोकशी में गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उसे दो वर्ष की कैद व एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। कोतवाली पुलिस ने 2017 में चौधकियापुर निवासी श्रवण कुमार को दोषी करार देकर न्यायालय उठने तक की सजा व दो हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।