शहीद विजय की छुट्टी मंजूर हो गई थी। दस जून को गांव आना था। पंद्रह को तिलक समारोह व बीस जून को उनकी शादी थी। परिवार में विवाह समारोह की तैयारियां जोरशोर से चल रही थी। रविवार तड़के एक फोन सुनने के बाद सारे अरमान बिखर गए। दोनों परिवारों की खुशियां मातम में तब्दील हो गई। वह एक-दूसरे से ठिठक-ठिठक कर रोते दिखे।
फौजी विजय कुमार पांडेय की शादी पड़ोस के गांव बुढ़वा में किसान हरि नारायण द्विवेदी की बेटी संग तय हुई थी। हरिनारायण के दो बेटे पुलिस व एक बेटा बनारस संस्कृत विद्यालय में क्लर्क है। एक भाई इलाहाबाद में सरकारी वकील हैं। लड़की पक्ष 15 जून को तिलक लेकर आता और 20 जून को विजय के सिर में सेहरा बंधता। शहादत की खबर से जितना कृष्ण कुमार पांडेय का परिवार में आंसू छलके उससे कहीं ज्यादा व्यथित लड़की पक्ष के लोग थे। पिता ने बताया कि दस जून को बेटे को शादी के लिए घर आना था। बेटे से शनिवार दोपहर मोबाइल पर बात हुई थी। शादी के तैयारियों के बारे में बातचीत हुई थी। बेटे को बताया कि वह 15 जून को तिलक समारोह के लिए तंदूर भट्ठी के लिए ट्रैक्टर से लकड़ियां लेने जाने वाले हैं। बेटे ने दोपहर को गर्मी में जाने से मना किया था। ‘बोला था कि रविवार सुबह जाकर ले आना’। यह कहते पिता की आंखें छलक आईं। उनकी बेटे से अंतिम बार यह बात हुई थी।
फतेहपुर। शहीद विजय पांडेय का पार्थिव शरीर सुबह साढ़े सात बजे लखनऊ पहुंचेगा। जिलाधिकारी कुमार प्रशांत ने बताया कि लखनऊ की बटालियन के अधिकारियों की अगुवाई में विशेष वाहन से शहीद का शव उनके पैतृक गांव लाया जाएगा। प्रोटोकॉल के लिए उपजिलाधिकारी बिंदकी हरिहर राम और सीओ बिंदकी अभिषेक तिवारी को लगाया गया है। डीएम ने बताया कि गृह विभाग के शासनादेश के मुताबिक शहीद के माता-पिता को जिले से बीस लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वह स्वयं शहीद के अंतिम संस्कार में उपस्थित होंगे। इधर, शहीद विजय पांडेय के अंतिम दर्शन के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और जिले के प्रभारी मंत्री सत्यदेव पचौरी भी सोमवार को शहीद के गांव जाएंगे।
शहीद विजय कुमार अंतिम बार गांव छुट्टी पर 18 मार्च को आए थे। इसी दौरान रिश्ते की बात पक्की हो गई। शादी के कपड़ों की खरीदारी कर गए थे। जिसके बाद पांच अप्रैल को देश सेवा को वापस लौट गए थे। मां सविता देवी बदहवास हालत में बोली, ‘बेटा किसके लिए लाखों की साड़ियां, कपड़े खरीद कर रखा था। तू ही दुनिया छोड़कर चला गया’।
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- मां बोलीं, बेटे के लिए देश के आगे परिवार कुछ नहीं था
- टीवी में सीमा पर हमले की खबरें देख सिहर उठता था परिवार
अमर उजाला ब्यूरो
अमौली (फतेहपुर)। बहादुर माटी के लाल में जितना देश भक्ति का जज्बा भरा था उतना ही वह कलेजे का मजबूत भी था। उसने कभी भी परिवार को अपनी पीड़ा नहीं बताई। सरहद में छह सालों में उसने हर गुजरे दिन को परिवार को बेहतर तरीके से ही बताया।
शहीद बीएसएफ के जवान विजय कुमार पांडेय की मां सविता पांडेय को इलाके की महिलाएं किसी तरह से ढांढस बंधाकर पानी पिला देती रहीं। जरा सा सामान्य होते ही वह पुराने दिनों के ख्यालों की चर्चा करने लगती। ऐसे ही सविता महिलाओं से बोलीं कि टीवी पर अक्सर जम्मू-कश्मीर में दुश्मन देश की ओर से हमले की खबरें देखती थीं। जम्मू-कश्मीर का नाम आते ही उनके रोंगटे खड़े हो जाते रहे। फौरन बेटे का हाल जानने के लिए फोन लगाती थी। बेटे की आवाज सुनने के बाद सुकून मिल जाता था। बेटा हमेशा बोलता था कि वह उसकी चिंता कतई न करेे। उसकी तैनाती गोलीबारी वाले बार्डर इलाके से काफी दूर है। उसे कभी भी कुछ नहीं हो सकता है। टीवी में अक्सर जवानों के समस्याओं और रहन-सहन के बारे में दिखाया जाता है। बेटे ने कभी कोई समस्या नहीं बताई है। अब लगता है कि कलेजे का टुकड़ा कलेजा का बहुत मजबूत था।
शहीद के पिता के बड़े भाई स्वामी अक्षयानंद जी महाराज हरिद्वार स्थित आश्रम के महंत हैं। करीब बीस साल पहले बाबा महादेव पांडेय साधु होकर हरिद्वार चले गए थे। दोनों हरिद्वार में कई वर्षों से रहते हैं। उन्हें परिवार के लोगों ने घटना की खबर दी है। ब्यूरो