न्यायालय के रोक के बाद पॉलिथीन का इस्तेमाल कम हो
गया है हालांकि अभी भी कुछ दुकानदार चोरी छिपे पॉलिथीन पर सामग्री रखकर बेच
रहे हैं। इन पर रोक लगाने के लिए पालिका प्रशासन की छापेमारी भी बेअसर
साबित हो रही है।
शहर में प्रतिबंध के बाद भी कई इलाकों में पॉलिथीन का
इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में कोर्ट के आदेश का शत प्रतिशत अनुपालन
नहीं हो पा रहा है।
हालांकि जिलाधिकारी ने पालिका प्रशासन को लगातार
छापेमारी कर पॉलिथीन का इस्तेमाल करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए
हैं लेकिन पालिका प्रशासन ताबड़तोड़ छापेमारी नहीं कर रही है।
अधिकांश लोग
तो अब पॉलिथीन प्रतिबंधित होने से स्वयं घर से झोला लेकर सामग्री लेने के
लिए निकल रहे हैं। मुराइनटोला निवासी मुकेश मिश्रा, कलक्टरगंज के ओम प्रकाश
बाजपेयी ने बताया कि जब से पॉलिथीन पर रोक लगी है
तब से झोला लेकर ही
निकलते हैं। दुकानों में भी सामग्री लिफाफे में दी जा रही है। न्यायालय का
फैसला बहुत अच्छा है। इस पर प्रशासन को सख्ती से रोक लगानी चाहिए। चौक में
कपड़े के झोले की दुकान सज गई हैं।
15 से 20 रुपये का एक झोला बिक रहा है।
इसी प्रकार पीरनपुर, ज्वालागंज, अरबपुर आदि इलाकों में पुराने अखबार से
लिफाफे बनाने का काम तेज हो गया है। दुकानदारों ने भी डिमांड बढ़ा दी है।
पीरनपुर में लिफाफे बनाने का काम करने वाली शबनम, तरन्नुम कहती हैं कि
प्रतिदिन दो से तीन सौ लिफाफे बनाते हैं। अब डिमांड बढ़ने से अधिक लिफाफे
बना रहे हैं।
अधिशासी अधिकारी रश्मि भारती ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद
पॉलिथीन पर रोक लगाई जा रही है। इसके लिए सफाई निरीक्षक को छापेमारी के
निर्देश दिए जा चुके हैं। दुकानदार खुद पॉलिथीन का इस्तेमाल न करें। यह
प्रदूषण के लिए हानिकारक है। अधिक से अधिक लोगों को जागरुक किया जा रहा है।