फतेहपुर। जिला अस्पताल के डॉक्टर बाजार की दवाओं में कई-कई विटामिन, कैल्शियम और एंटीबायोटिक दवाएं लिख रोगियों की जेब खाली कर रहे हैं, जबकि एक विटामिन और एंटीबायोटिक दवा से काम चल सकता है। यह दवाएं भी ऐसी हैं, जो जिला अस्पताल के सामने किसी एक मेडिकल स्टोर में ही उपलब्ध होती हैं। इसके अलावा जिले के किसी अन्य मेडिकल स्टोर में इस नाम की दवा नहीं मिलेगी।
डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री की रोक के बावजूद जिला अस्पताल के डाक्टर बाजार की दवाएं लिखने से बाज नहीं आ रहे। पर्चे में राइटिंग पकड़ने से बचाव के लिए डाक्टर बाहरी व्यक्ति को अपने पास बैठाकर बोलकर पर्चे में दवाएं लिखाते हैं। पर्चे में एक ही रोगी को कई-कई एक साथ विटामिन, कैल्शियम, एंटीबायोटिक लिखी जाती हैं। इसका कारण संबंधित दवा कंपनी से मिलने वाला मोटा लिफाफा है। संबंधित डाक्टर का लिखा पर्चा किसी भी मेडिकल स्टोर में भले ही जाए, लेकिन वहां के कर्मी को दवा लेने संबंधित मेडिकल स्टोर से लाकर देना पड़ता है। ज्यादातर डाक्टरों की कुछ चुनिंदा दवाएं हैं, जो हर मरीज को लिखना तय है।
मुकुतारा के पति इमाम बख्श जिला अस्पताल में पत्नी का परीक्षण कराके प्राइवेट मेडिकल स्टोर पहुंचे। उन्हें डॉक्टर ने बताया कि दो दवाएं अस्पताल में मिलेंगी। बकाया दवा बाहर से मिलेंगी।
सरकारी पर्चे के पीछे दवाएं लिखाकर पहुंचे पिंटू ने बताया कि मां की कमर में दर्द है। एक डॉक्टर को दिखाया था। उन्होंने दवा लिखी है। मैंने स्वयं कहा कि दवा बाहर की लिखें।
बाहर से लिखी दवाओं में विटामिन और एंटीबायोटिक का ज्यादा प्रयोग होता है। एक-एक पर्चा में 650 से 700 रुपये की दवा लिखी होती है। इसमें 50 प्रतिशत से अधिक का कमीशन होता है।
जिला अस्पताल में हर बीमारी की दवा उपलब्ध है। उसके बाद भी दवाएं बाहर की लिखी जा रही हैं। इस संबंध में जिला अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि एक्सपायर होने से तीन-चार महीने पहले अधिक मात्रा में उपलब्ध दवाओं को सीएचसी और पीएचसी भेज दिया जाता है।
जिला अस्पताल में कैल्शियम, विटामिन, एंटीबायोटिक समेत सभी बीमारियों की पर्याप्त दवाओं का स्टॉक है। बाजार की दवा लिखना चिंता का विषय है। अगर कोई डॉक्टर मेडिकल स्टोर की दवा लिखता है, तो उसके खिलाफ उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा।
- डॉ. पीके सिंह, सीएमएस