फतेहपुर। धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास और दुष्कर्म के मामले की विवेचना नए सिरे से शुरू की जा रही है। पुलिस का कहना है कि किशोरी के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धाराएं बढ़ाईं जा सकती हैं।
औंग थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली किशोरी (हाईस्कूल छात्रा) को तीन नवंबर को विशेष समुदाय के युवक रानू के इशारे पर रोशन और इरशाद अगवा कर ले गए थे। उसके साथ कानपुर घाटमपुर स्थित एक अमरूद की बाग में दुष्कर्म किया गया। दुष्कर्म के बाद मस्जिद में ले जाकर धर्मपरिवर्तन और निकाह की तैयारी थी।
किशोरी को खोजने के बाद विवेचक ने पूरे मामले को रफा दफा कर दिया था। मामले के तूल पकड़ने पर रानू को पुलिस ने अपहरण के आरोप में जेल भेज दिया। दूसरे दिन किशोरी के बयान पर भी पुलिस हरकत में नहीं आई। इसके बाद सात नवंबर को हालत बिगड़ने पर किशोरी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां किशोरी ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया। लापरवाही का आलम यह रहा कि पुलिस ने किशोरी का मेडिकल परीक्षण भी कराना ठीक नहीं समझा।
मामले में पहले विवेचक एसएसआई ईश्वरचंद्र पर गंभीर आरोप लगे थे। इस पर विवेचना प्रशिक्षु अभिषेक को दी गई थी। शनिवार को एक बार फिर मामले के विवेचक में बदलाव किया गया है। अब विवेचना खुद थानाध्यक्ष हनुमान प्रताप सूर्यवंशी करेंगे। बताया गया कि किशोरी एक बार फिर से बयान लिए जाएंगे।
शनिवार को पुलिस किशोरी को मेडिकल परीक्षण के लिए लेकर गई। थानाध्यक्ष ने बताया कि पूर्व विवेचक पर आरोप संबंधी रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी गई है। जांच नए सिरे से शुरू की गई है। पॉक्सो एक्ट व दुष्कर्म की धारा रानू के खिलाफ बढ़ाई गई है।
फतेहपुर। मामले में पूर्व विवेचक और थाने एसएसआई ईश्वरचंद्र पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि किशोरी को इतना डराया-धमकाया कि मामला बढ़ाने पर आरोपी पक्ष उसके भाइयों की हत्या तक कर देगा। विवेचक ने बयान के दौरान ही किशोरी को दबाव में ले लिया था। उसे पहले ही सबकुछ समझा दिया और मेडिकल से भी इन्कार करने की बात कही थी। कोर्ट के समक्ष किशोरी ने बयान में स्पष्ट किया कि वह रानू के साथ जाना चाहती थी। बाद में वह परिजनों के साथ रहने को कैसे राजी हो गई।