फतेहपुर। पुलिसिया कार्रवाई पर प्रशासन ने प्रश्नचिह्न लगाए हैं। सदर एसडीएम प्रमोद झा ने एक इंस्पेक्टर और सात दारोगाओं को नोटिस देकर उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं और सभी को 19 अक्तूबर को कोर्ट में तलब किया है। दरअसल पुलिस ने ऐसे व्यक्तियों के विरुद्घ निरोधात्मक कार्रवाई कर दीं, जो लंबे अरसे से यहां आए ही नहीं। एक नाबालिग पर मिनी गुंडा एक्ट लगा दिया गया।
थरियांव थाने में तैनात रहे विनोद कुमार सिंह ने रमवां गांव के एक नाबालिग के विरुद्ध मिनी गुंडा एक्ट की कार्रवाई की है। मलवां इंस्पेक्टर शेर सिंह राजपूत ने ऐसे व्यक्ति के ऊपर मिनी गुंडा एक्ट लगा दिया जो कई वर्षों से मुंबई में रह रहा है। इसकी पुष्टि ग्राम प्रधान ने भी लिखित रूप से की है। इसी तरह शाह चौकी में रहे एसआई संदीप तिवारी ने शिवसेवक विश्वकर्मा के ऊपर मनमाने तरीके से कार्रवाई कर दी। मलवां थाने में रहे एसआई राजेंद्र यादव, एसआई मनवीर सिंह, एसआई सुरेश तिवारी, एसआई घनश्याम शुक्ल व एसआई उमाशंकर द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों में की गईं निरोधात्मक कार्रवाईयों पर भी सवाल उठे हैं। इनकी शिकायतें पीड़ितों ने अधिकारियों तक पहुंचाई हैं। कार्रवाई के लिए उपजिलाधिकारी न्यायालय पहुंची पत्रावलियों का एसडीएम ने अवलोकन किया तो पुलिस की लापरवाही उजागर हो गई। उपजिलाधिकारी प्रमोद झा ने मलवां इंस्पेक्टर और सात दरोगाओं को नोटिस देकर संबंधित मामलों में साक्ष्य सहित 19 अक्तूबर को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है।
एसडीएम सदर प्रमोद झा ने बताया कि कार्रवाई कर रहे निरीक्षक अथवा उप निरीक्षक की जिम्मेदारी है कि वह मौके पर जाकर जांच करें और किसी भी पूर्वाग्रह में आकर कोई कार्रवाई न हो। जो मामले में सामने आए हैं उनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो या तो यहां रहते नहीं है या फिर नाबालिग है। मामले में साक्ष्य मांगे गए हैं।