शिवराजपुर गांव स्थित ऐतिहासिक गिरधर गोपाल की मूर्ति लूटकांड के आरोपियों कोक्राइम ब्रांच टीम ने शनिवार की भोर पहर गिरफ्तार कर लिया। दो लुटेरे घाटमपुर के और एक जहानाबाद थाना क्षेत्र का सर्राफा व्यवसायी का पुत्र निकला है। लूट की घटना पूरा रूट प्लान तैयार करने के बाद अंजाम दी गई थी। घटना के एक पखवारे पहले से वारदात के लिए रेकी की जा रही थी। पुलिस ने मूर्ति का गायब मुकुट, आंखे और लूट में इस्तेमाल स्कार्पियो बरामद की है।
पुलिस लाइन में पुलिस अधीक्षक अनीस अहमद अंसारी ने बताया कि औंग थाना क्षेत्र के शिवराजपुर गांव स्थिति गिरधर गोपाल की ऐतहासिक मूर्ति 5 अप्रैल को स्कार्पियो सवार बदमाश लूट ले गए थे। बदमाशों ने द्वारिकापुर जट थाना जहानाबाद के जंगल में मूर्ति छिपा दी थी। पुलिस की छानबीन के दौरान मूर्ति बरामद हो गई थी। लेकिन लुटेरे नहीं पकड़े जा सके थे। लुटेरों को दबोचने के लिए चांदपुर एसओ अजय सेठ, क्राइम ब्रांच प्रभारी मनोज रघुवंशी, सर्विलांस प्रभारी राजेश सिंह और रावेंद्र सिंह की टीम जुटी थी। सर्विलांस की लोेकेशन पर बदमाशों को ट्रैस किया था। टीम ने शनिवार की भोर पहर मकरंदपुर मोड़ थाना चांदपुर के पास स्कार्पियो के साथ आरोपी शवगोविंद यादव पुत्र राम निवासी बेरीखेड़ा चौकी बिरहर घाटमपुर कानपुर और हिमांशु शुक्ला पुत्र रविकांत शुक्ला निवासी ठकुरन गली थाना जहानाबाद को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर मूर्ति की आंखे, मुकु ट बरामद किया गया। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि वीर सिंह यादव पुत्र गंगानरायण निवासी ऐमनपुर चौकी बिरहर थाना घाटमपुर की प्लानिंग पर उन लोगों ने मूर्तिकांड को अंजाम दिया था। स्कार्पियो की शिवगोविंद को किस्त जमा करनी थी और उन दोनों को भी रुपयों की जरूरत थी। वह लोग घटना से एक पखवारे पहले शिवराजपुर गांव पहुंचे थे। वहां से लूट की योजना और भागने का रुट तय किया था। इसके बाद घटना को अंजाम देकर फरार हो गए थे। लेकिन मूर्ति पत्थर की निकली थी। इसी वजह से अच्छी कीमत नहीं मिल सकी थी।
इंसेट
अय्याशी में खर्च कम पड़ा तो बने लुटेरे
शिवराजपुर मूर्ति लूटकांड को अंजाम देने वाले बदमाश रंगरूट निकले। पुलिस लाइन में आरोपी शिवगोविंद ने बताया कि वह स्कार्पियो का मालिक है। वह और उसका पिता खाड़ी देश में नौकरी करते थे। खाड़ी देश से शिवगोविंद छह माह पहले लौटक र आया था। उसने सारी कमाई स्कार्पियो में लगा दी थी। अब उसके पास स्कार्पियो की किस्त जमा करने को रुपये नहीं थे। इसी तरह से हिमांशु शुक्ला के पिता की जहानाबाद कस्बे में सर्राफे और बर्तन की दुकान है। ठीक ठाक व्यवसाय के बावजूद हिमांशू को अपनी अय्याशी पूरी करने के लिए रुपयों की जरूरत थी। इसी वजह से इन्होंने लूट की घटना को अंजाम दे डाला।